पोकरण क्षेत्र में सामने आए गौहत्या के गंभीर मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। जानकारी के अनुसार 8 जनवरी को प्रार्थी राजूसिंह पुत्र डूंगरसिंह राजपूत निवासी बिलिया ने पोकरण पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। रिपोर्ट में बताया गया कि 7 जनवरी की रात्रि को अज्ञात बदमाशों द्वारा एक गौवंश की हत्या कर दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू की।
घटना की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए जिला पुलिस अधीक्षक जैसलमेर अभिषेक शिवहरे के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पोकरण प्रवीण कुमार के नेतृत्व में तथा वृत्ताधिकारी भवानीसिंह के सुपरविजन में विशेष पुलिस टीमों का गठन किया गया। पोकरण थानाधिकारी भारतसिंह रावत के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने गहन अनुसंधान और आसूचना संकलन के आधार पर इस मामले में तीन आरोपियों को नामजद करते हुए उन्हें दस्तयाब किया। बाद में पूछताछ के पश्चात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में गफार खां (55) निवासी गोमट, मुराद अली (24) निवासी गोमट तथा मोहम्मद सरीफ उर्फ कालू (23) निवासी सिपाहियों का मोहल्ला, पोकरण शामिल हैं। पुलिस द्वारा आरोपियों से घटना को लेकर गहन पूछताछ की जा रही है तथा मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच जारी है। इस कार्रवाई में पोकरण, सांकड़ा, लाठी, भणियाणा, रामदेवरा थानों सहित जिला पुलिस कार्यालय की विभिन्न टीमों ने संयुक्त रूप से भूमिका निभाई।
पुलिस प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस अन्य संभावित तथ्यों की भी पड़ताल कर रही है।
कई गंभीर सवाल…?
लेकिन यह कार्रवाई कई गंभीर सवाल खड़े करती है। यह अपराध किसी तात्कालिक आवेश का परिणाम नहीं, बल्कि संगठित गिरोह द्वारा लंबे समय से चल रहा सामूहिक कृत्य प्रतीत होता है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या जैसलमेर पुलिस का मुखबिरी और खुफिया तंत्र इतना कमजोर हो चुका है कि ऐसे गिरोह की भनक तक नहीं लग पाई? प्रेस नोट जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। ज़रूरत है पूरे नेटवर्क को उजागर करने, उसके संरक्षणकर्ताओं तक पहुँचने और सख़्त कार्रवाई की। जनभावनाएँ आहत हैं, अब सिर्फ़ गिरफ़्तारी नहीं, न्याय और जवाबदेही चाहिए।










