राजस्थान विधानसभा में हंगामे पर सत्ता पक्ष का विरोध, कहा विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को किया नजरअंदाज

राजस्थान विधानसभा में हंगामे पर सत्ता पक्ष का विरोध, कहा विपक्ष ने लोकतांत्रिक मर्यादाओं को किया नजरअंदाज

जयपुर, 5 मार्च।  राजस्थान विधानसभा के बजट सत्र के दौरान विपक्षी विधायकों के व्यवहार को लेकर सत्ता पक्ष ने कड़ी नाराजगी जताई है. सत्ता पक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि विपक्ष के कुछ सदस्यों ने आसन के प्रति अमर्यादित व्यवहार किया और असंसदीय शब्दों का प्रयोग किया. उन्होंने कहा कि यह आचरण राजस्थान की समृद्ध विधायी परंपराओं के खिलाफ है और इसकी निंदा की जानी चाहिए.

विधानसभा परिसर में नेताओं ने जताया रोष –

विधानसभा परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए कोटा दक्षिण के विधायक संदीप शर्मा, कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत, शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और सादुलशहर के विधायक गुरुवीर सिंह ने संयुक्त रूप से विपक्ष के व्यवहार पर सवाल उठाए. नेताओं ने कहा कि विपक्ष का यह रवैया लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय परंपराओं के अनुरूप नहीं है.

समय सीमा खत्म होने पर शुरू हुआ विवाद –

विधायक संदीप शर्मा ने बताया कि उस समय वे सभापति की भूमिका निभा रहे थे और सदन की कार्यवाही नियमों के अनुसार संचालित की जा रही थी. उन्होंने कहा कि चर्चा के लिए तय पांच मिनट की समय सीमा पूरी होने पर घंटी बजाकर संकेत दिया गया था. इसके बाद विपक्ष के कुछ वरिष्ठ सदस्यों ने आसन को चुनौती दी और उग्र होकर आपत्तिजनक व्यवहार किया. शर्मा ने कहा कि सदन में व्यवस्था बनाए रखना आसन का अधिकार है लेकिन विपक्ष ने व्यक्तिगत टिप्पणियां कर सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाई.

अविनाश गहलोत ने कहा यह विधायी गुंडागर्दी –

कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने विपक्ष के व्यवहार को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया. उन्होंने कहा कि कांग्रेस विधायकों का आचरण विधायी गुंडागर्दी जैसा दिखाई देता है. गहलोत ने आरोप लगाया कि विपक्ष के नेता ने सभापति के खिलाफ जिस तरह की असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया वह पूरे राजस्थान की जनता ने देखा है. उनके अनुसार यह केवल एक व्यक्ति नहीं बल्कि पूरे सदन और जनता के विश्वास का अपमान है.

फुटेज की जांच कर कार्रवाई की मांग –

शिक्षा मंत्री मदन दिलावर और विधायक गुरुवीर सिंह ने कहा कि विपक्ष का इस तरह का व्यवहार पहले भी देखा गया है. उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज की समीक्षा कर दोषी सदस्यों के खिलाफ सख्त विधिक और अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की मांग की है. उनका कहना है कि विपक्ष को रचनात्मक बहस करनी चाहिए न कि सदन को विवाद का मंच बनाना चाहिए.

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