मंगलवार को भाजपा विधायक दीप्ति किरण माहेश्वरी ने प्रताप से संबंधित विकास और स्मारक कार्यों को लेकर प्रश्न उठाया। इस पर सत्ता पक्ष की ओर से जवाब देते हुए डिप्टी सीएम दीया कुमारी विपक्ष के निशाने पर आ गईं। विपक्ष ने बजट प्रावधान और वास्तविक खर्च के बीच अंतर को लेकर सरकार से जवाब मांगा, जिसके बाद सदन में तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
दीया कुमारी ने सदन को बताया कि इस योजना के लिए दो वर्ष पहले 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था। इस पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पूछा कि दो वर्षों में इस राशि में से कितना खर्च किया गया। जवाब में दीया कुमारी ने बताया कि अब तक 2 लाख 83 हजार रुपये ही खर्च हुए हैं। इस आंकड़े के सामने आने के बाद विपक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए।
कांग्रेस विधायक गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार के मंत्री बेहद अक्षम हैं। उन्होंने बजट राशि के मुकाबले बेहद कम खर्च को लेकर सरकार की कार्यक्षमता पर प्रश्न उठाए। हालांकि दिया कुमारी ने भी तीखे लहजे में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि जो भी काम होगा, वह पूरा होगा। उन्होंने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि उनकी सरकार काम अधूरा नहीं छोड़ती।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायकों ने आपत्ति जताई और गोविंद सिंह डोटासरा भी बोलने लगे। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि जब डीपीआर बन चुकी है तो काम शुरू होगा, इसमें और क्या शेष है। उन्होंने सदस्यों को बार-बार खड़े होकर व्यवधान उत्पन्न न करने की सलाह दी। सदन में इस मुद्दे पर हुई बहस ने बजट प्रावधान और उसके क्रियान्वयन को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच मतभेद को उजागर कर दिया।









