विश्व प्रसिद्ध अंतर्राष्ट्रीय पुष्कर मेले 2025 का मुख्य आकर्षण गुरुवार शाम का भव्य दीपोत्सव और महाआरती कार्यक्रम रहा। इसमें अजमेर जिला कलेक्टर लोकबंधु, एडिशनल एसपी ग्रामीण डॉक्टर दीपक कुमार शर्मा सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने भाग लिया । शाम होते ही पुष्कर सरोवर के 52 घाटों पर सवा लाख दीपक जलाए गए, जिससे पूरा सरोवर दिव्य आभा से नहा उठा। दीपों की झिलमिलाती रोशनी और रंगीन सजावट ने वातावरण को भक्ति और सौंदर्य से भर दिया।

इस अवसर पर जयपुर घाट को आकर्षक रूप से सजाया गया । फूलों, रंगोली और लाइटों से सजे घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। जैसे ही दीप जलाए गए, सरोवर का प्रतिबिंब मंत्रमुग्ध कर देने वाला दृश्य प्रस्तुत कर रहा था। श्रद्धालुओं ने ‘जय पुष्करराज’ और ‘जय ब्रह्मा देव’ के जयकारों के बीच दीपदान किया।
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जिला कलेक्टर लोकबंधु ने व एडिशनल एसपी ग्रामीण डॉ दीपक कुमार शर्मा सहित अन्य अधिकारियों ने स्वयं जयपुर घाट पर पहुंचकर पुष्कर सरोवर की विधिवत पूजा-अर्चना और महाआरती की। उन्होंने प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। आरती के दौरान भजनों, घंटियों और शंखनाद की ध्वनि से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि पुष्कर की पहचान केवल राजस्थान में नहीं, बल्कि विश्वभर में आध्यात्मिकता और संस्कृति के केंद्र के रूप में है। उन्होंने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को अपनाने का आह्वान भी किया। दीपों से सजे घाटों और भक्तिमय आरती के इस दृश्य ने पुष्कर मेले के पहले दिन को यादगार बना दिया।

1 करोड़ के भैंसे-घोड़े, ₹10000 में बिक रहे ऊंट
विश्व प्रसिद्ध पुष्कर पशु मेला इस बार पशुधन व्यापार के दो विरोधाभासी चेहरे दिखा रहा है. एक ओर मुर्रा नस्ल के भैंसे और शानदार घोड़े करोड़ों रुपये की बोली लगा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान की पहचान कहे जाने वाले ऊंटों को अनिश्चित बाजार और मात्र ₹10,000 से शुरू होने वाली कीमतों का सामना करना पड़ रहा है. मेले में करोड़ों के ‘सितारों’ के बीच, ऊंटों के परिवहन पर प्रतिबंध हटने के बावजूद बाजार में निराशा छाई हुई है, जिसका सीधा असर पशुपालकों की उम्मीदों पर पड़ा है पुष्कर पशु मेले में इस साल बलबीर, बादल, नगीना और शहजादी जैसे पशु नए आकर्षण का केंद्र बने हैं, जिनकी कीमत ₹1 करोड़ से भी ऊपर है

डीडवाना के डूंगाराम का 35 महीने का मुर्रा नस्ल का भैंसा ‘बलबीर’ इस मेले का सबसे महंगा पशु है, जिसकी कीमत ₹1 करोड़ लगाई गई है. 800 किलो वजनी और 5 फीट 8 इंच ऊंचा ‘बलबीर’ मुर्रा नस्ल का है, जो अपनी उच्च दुग्ध उपज और मजबूती के लिए जाना जाता है. डूंगाराम के मुताबिक, ‘बलबीर’ को घी, दूध, हरा चारा और विशेष प्रोटीन केक (खल) खिलाया जाता है, और इसके रखरखाव पर हर महीने ₹35,000 खर्च होता है. ‘बलबीर’ का उपयोग मुख्य रूप से प्रजनन (Breeding) के लिए किया जाता है और यह वर्तमान में महीने में ₹80,000 तक कमाता है. डूंगाराम को उम्मीद है कि 4 साल की उम्र के बाद इसकी आय तीन गुना तक बढ़ सकती है

अजमेर के केकड़ी का घोड़ा ‘बादल’ अपनी ऊंचाई और आकर्षक रूप से सोशल मीडिया सेंसेशन बन गया है. इसके मालिक राहुल का दावा है कि इसे ₹15 लाख की लागत से एक बॉलीवुड फिल्म में काम करने का ऑफर मिला है, जिसमें ₹10 लाख एडवांस मिल चुके हैं. ‘शहज़ादी’ नाम की सफेद घोड़ी अपने डांस स्टेप्स से लोगों का दिल जीत रही है, जिसकी कीमत ₹51 लाख है. वहीं, पंजाब की ‘नगीना’ घोड़ी की कीमत ₹1 करोड़ से अधिक बताई जा रही है और वह अपने एयर कंडीशन वाले विशेष वाहन (Horse Float) में पुष्कर पहुंची है








