अमेरिका और ईरान के बीच जंग को 36 दिन हो चुके हैं, लेकिन कोई भी पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. इस बीच यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार चेतावनी दी है कि अगर ईरान तय समय के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज नहीं खोलता है तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. उन्होंने ट्रूथ सोशल पर पोस्ट कर लिखा कि समय तेजी से बीत रहा है. अमेरिका ने ईरान को समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खोलने को लेकर को समय दिया था उसमें अब सिर्फ 48 घंटे बचे हैं.
ट्रंप ने कहा, ‘याद है जब मैंने ईरान को समझौता करने या होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए 10 दिन का समय दिया था. समय तेजी से बीत रहा है. 48 घंटे के बाद अमेरिका उन पर कहर बनकर टूट पड़ेगा.’ ट्रंप ने 26 मार्च को दावा किया था कि उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच समझौता करने की समय सीमा बढ़ा दी है. उन्होंने कहा था कि इस दौरान अमेरिका ईरान के पावर प्लांट को निशाना नहीं बनाएगा. हालांकि ईरान ने युद्ध समाप्त करने के अमरिकी प्रस्ताव को एकतरफा और अनुचित कहकर खारिज कर दिया था.
ट्रंप ने कहा कि ईरान ने अपने पावर प्लांट पर 7 दिन हमला नहीं करने का समय मांग था, लेकिन उन्होंने इस समय सीमा को बढ़ाकर 10 दिन करने का फैसला किया, जो 6 अप्रैल को खत्म हो रही है. फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि तेहरान के अधिकारियों ने उनके प्रशासन से संपर्क किया था और कूटनीतिक बातचीत के तहत और समय देने की मांग की थी. ट्रंप ने कहा, ‘उन्होंने मेरे लोगों के जरिए मुझसे बहुत ही विनम्रता से पूछा कि क्या हमें थोड़ा और समय मिल सकता है? अगर वे मेरी बात नहीं मानेंगे तो मैं उनके पावर प्लांट तबाह कर दूंगा.
होर्मुज को लेकर ट्रंप बार-बार अपने बयान बदलते रहे हैं. शनिवार को दस दिन की मोहलत से पहले ट्रंप ने इसे न खोलने की दशा में 48 घंटे के बाद पावर प्लांट पर हमले की धमकी दी थी. फिर इसकी मियाद 10 दिन तक बढ़ा दी और बीच में एक और बयान दिया जिसमें नाटो को निशाने पर लेते हुए कहा कि होर्मुज खुलवाने की जिम्मेदारी अब उनकी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस रास्ते से तेल की जरूरत नहीं है और जो देश इस पर निर्भर है, वही इसकी जिम्मेदारी उठाएं.
ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने ईरान को होर्मुज को लेकर इसलिए चेतावनी दी क्योंकि कई देश इस मुद्दे पर अमेरिका का साथ देने से पीछे हट गए थे. उन्होंने कहा कि जो देश इस रास्ते से तेल पर निर्भर हैं, उन्हें आगे आकर इसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेनी चाहिए, जबकि अमेरिका उनकी मदद करेगा. 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर हमले के बाद से ही ईरान ने इस रास्ते को लगभग बंद कर दिया है, जिससे तेल सप्लाई पर भारी असर पड़ा है







