मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच भारत सरकार ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अलर्ट मोड में है और देशभर में ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए तेजी से कदम उठा रही है. सरकार ने राज्यों को निर्देश दिया है कि वे कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के वितरण को बढ़ाकर 70 प्रतिशत तक करें. इस संबंध में पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीजर मित्तल ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को पत्र लिखकर संशोधित आवंटन योजना की जानकारी दी है.
इस योजना के तहत मौजूदा 50 प्रतिशत कॉमर्शियल एलपीजी आवंटन के अलावा अतिरिक्त 20 प्रतिशत बढ़ाने का प्रस्ताव रखा गया है, जिससे कुल आवंटन 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा यानी संकट से पहले वाले स्तर के करीब.
केन्द्र का राज्यों को निर्देश
केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी स्पष्ट किया कि स्टील, ऑटोमोबाइल, टेक्सटाइल और अन्य श्रम-प्रधान उद्योगों को प्राथमिकता दी जाएगी, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पाइप्ड गैस की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

सरकार का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब हाल ही में लोगों को यह भरोसा दिलाया गया है कि देश में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कोई कमी नहीं है. प्रशासन ने साफ किया है कि ईंधन आपूर्ति तंत्र पूरी तरह नियंत्रण में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है.
ईंधन पर सरकार का बयान
इसके साथ ही सरकार ने अफवाहों से बचने की अपील करते हुए कहा है कि घरेलू एलपीजी की उपलब्धता पर्याप्त है और उत्पादन भी बढ़ाया जा रहा है, ताकि आने वाले समय में भी आपूर्ति सुचारु बनी रहे. गौरतलब है कि ईरान पर अमेरिका और इजरायल की ओर से किए गए हमलों का चौथा हफ्ता चल रहा है, लेकिन अब तक इस युद्ध के खत्म होने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं. इस बीच Strait of Hormuz के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है.
भारत में भी इसका असर साफ देखा जा रहा है. एक तरफ प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में इजाफा किया गया है, तो वहीं औद्योगिक ईंधन यानी डीजल के दाम भी बढ़ाए गए हैं. इसके अलावा, घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए कॉमर्शियल एलपीजी गैस की आपूर्ति को सीमित कर दिया गया था, ताकि आम उपभोक्ताओं को किसी तरह की परेशानी न हो.
यानी, वैश्विक तनाव का सीधा असर भारत के ऊर्जा सेक्टर पर पड़ रहा है, और सरकार लगातार संतुलन बनाने की कोशिश में जुटी हुई है ताकि आम लोगों और उद्योगों दोनों की जरूरतें पूरी की जा सकें







