सुमेरपुर / शहर में लम्बे समय से व्यपारियो की मांग हे की कुछ लोग बहार से आकर शहर में फेस्टिवल ( मेले ) लगाते हे वो मेले बंद हो जिसको लेकर सुमेरपुर रेडीमेड सहित विभिन व्यपारियो ने कही बार नगर पालिका और उपखंड प्रशासन को ज्ञापन देकर फेस्टिवल ( मेले ) बंद करवाने की शिकायत भी अवगत कराई गई
हाल में ही कुछ महीनों पहने भी इसी तरह व्यपारियो ने शहर के मेहता प्याऊ पर विरोध प्रदर्शन किया था जिस पर प्रशासन ने व्यपारियो को कार्यवाही का आश्वासन देकर धरना प्रदर्शन समाप्त किया था
आज सोमवार को फिर रेडीमेड सहित विभिन व्यपारियो द्वारा शहर के मेहता प्याऊ ( मेंन बाज़ार ) पर फेस्टिवल ( मेले ) के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया व्यपारियो ने स्थानीय प्रशासन और विधायक एवं कैबिनेट मंत्री के खिलाफ में नारेबाजी नारेबाजी कर विरोध जताया उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे।
परेशान व्यपारी की जुबानी
व्यापारियों का कहना हे की कि पहले से ऑनलाइन और मंदी की मार झेल रहे व्यापारियों को मेला लगने के कारण भारी नुकसान होगा। उनका आरोप है कि मेले के जरिए बाहरी व्यापारियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे स्थानीय दुकानदारों का व्यवसाय दिनों-दिन घटता जा रहा है। व्यापारियों ने बताया कि बाजार पहले से ही मंदी की मार झेल रहा है, ऐसे में मेले लगने से ग्राहकों का रूझान स्थायी दुकानों की ओर कम हो गया है। अस्थायी दुकानों में कम कीमत पर सामान मिलने से व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। साथ ही स्थानीय दुकानें किराया, बिजली, टैक्स और कर्मचारियों का वेतन चुकाती हैं। जबकि मेले में आने वाले बाहरी व्यापारियों को इन अतिरिक्त खर्चों का सामना नहीं करना पड़ता।
फेस्टिवल मेले से शहर के व्यापारियों को नुकसान
फेस्टिवल मेले से शहर के व्यापारियों को कई तरह से नुकसान हो सकता है, जैसे ग्राहकों का मेले की ओर आकर्षित होना जिससे स्थानीय दुकानों पर भीड़ कम होती है, मेले में सस्ती और बड़ी मात्रा में मिलने वाले उत्पादों से स्थानीय व्यापारियों के सामान की बिक्री पर असर, और मेले में होने वाली प्रतिस्पर्धा के कारण कीमतों में गिरावट, जिससे मुनाफे में कमी आती है, साथ ही मेले की अस्थायी प्रकृति से शहर के स्थायी बाजार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जिससे व्यापार का संतुलन बिगड़ जाता है। मेले अस्थायी होते हैं, लेकिन वे ग्राहकों की खरीदारी की आदतें बदल देते हैं; एक बार मेले में सस्ता सामान मिलने के बाद लोग स्थानीय दुकानों से खरीदना पसंद नहीं करते। जहां मेले मनोरंजन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र होते हैं, वहीं वे अक्सर शहर के नियमित व्यापारियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करते हैं, जिससे उनके व्यवसाय पर सीधा नकारात्मक असर पड़ता है।
स्थानीय व्यापारी जो किराये पर दुकानें चलाते हैं, टैक्स भरते हैं, विभागीय अनुमति लेते हैं—उनके हितों के खिलाफ इस प्रकार के निजी मेले होते हैं। ऑनलाइन शॉपिंग और बढ़ती प्रतिस्पर्धा के इस समय में ऐसे मेले दो-दो महीने चलकर स्थायी व्यापार को नुकसान पहुँचाते हैं। इसलिए मैंने सदन में भी और बाहर भी साफ कहा है कि सुंदरनगर ही नहीं, पूरे प्रदेश में ऐसे मेले बंद होने चाहिए।











