राजस्थान में इस साल अच्छे मानसून से प्रदेश के सभी बड़े बांध लबालब हैं। कई डैम के आस-पास के कुदरती टापू और पहाड़ियां अभी भी डूबी हुई हैं सुमेरपुर – बाली उपखंड के जवाई बांध क्षेत्र में हर साल करीब 4 महीने ऐसे ही हालात रहते हैं जवाई बांध क्षेत्र के देवगिरी पहाड़ी जहां बारिश की वजह से हर साल यहां रहने वाले 300-400 लंगूरों ( बंदरों ) पर ज़िंदगी और मौत का संकट आ जाता है. इन लंगूरों को बचाने के लिए हर साल आस-पास के गांवों से लाखों रुपये के फल और सब्जियां देवगिरी पहाड़ी पर पहुचाई जाती हैं

उपखंड के सेणा गांव के अलावा, बांध के पास बसे जीवंडा, दुदुनी, मोरी, कोठार गांवों के लोग भी बंदरों के लिए खाना लेकर यहां पहुंचते हैं. लंगूर भूखे न रहें, इसके लिए गांव वाले और वाइल्डलाइफ लवर हर दूसरे दिन करीब 100 kg खाना पहाड़ी पर ले जाते हैं. इनमें केले, आलू, सेब, चना, बिस्कुट, मूंगफली और गेहूं शामिल हैं
जानकारी के मुताबिक, यह खाना उन तक एक छोटी नाव के ज़रिए पहुंचाया गया. नाव छोटी होने की वजह से सामान ले जाने में करीब सवा घंटा लग गया. इस तरह नाव से 4 किलोमीटर का सफ़र करके जाना और आना पड़ता है. और जाने और आने में करीब 3.30 घंटे लगते हैं
पिछले कई सालो से जवाई बांध की पहाडियों पर यह स्थिति बनती है तो किया स्थानीय प्रशासन और राज्य सरकार की जिम्मेदारी नही बनती की बंदरों के लिए कुछ व्यवस्था की जाए उन्हें सरक्षण मिल सके
जानकारी के मुताबिक जवाई बांध 55 फीट तक भर जाने के बाद देवगिरी पहाड़ी का रास्ता बंद हो जाता है. हर साल यहां करीब 300 से 400 बंदर फंस जाते हैं. ऐसे में वे भूखे न रहें, इसके लिए हर साल चंदा इकट्ठा करके उनके खाने-पीने का इंतज़ाम किया जाता है. यह स्थिति 1996 से हर साल बनती है. बंदरों के लिए हमें सरकार से कोई मदद नहीं मिलती पिछले 3 महीने से पहाड़ी के चारों तरफ पानी भरा हुआ है. बांध के गेट 6 सितंबर को खुले थे. बांध की भराव क्षमता 61.25 फीट है. जवाई बांध से पीने और सिंचाई के लिए पानी सप्लाई हो रहा है. जनवरी तक पानी पहाड़ी के चारों तरफ भरा रहेगा











