विश्व प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले की औपचारिक शुरुआत आज (22 अक्टूबर को) विधिवत रूप से हो गई. मेला मैदान के ठीक सामने स्थित पशुपालन विभाग के अस्थायी कार्यालय का संयुक्त रूप से शुभारंभ पुष्कर के उपखंड अधिकारी गुरु प्रसाद तंवर और पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया ने किया. कार्यालय शुभारंभ के मौके पर अधिकारियों ने पारंपरिक रूप से गौ माता और श्री सांवरिया सेठ की तस्वीर की पूजा-अर्चना की. डॉ. घीया ने बताया कि मेले का विधिवत उद्घाटन 30 अक्टूबर को झंडारोहण के साथ किया जाएगा, जिसके बाद पशु व्यापार और खरीदी-विक्रय की गतिविधियां पूरी गति से शुरू हो जाएंगी

रेतीले धोरों में ऊंटों की रुणझुण और घोड़ों की टापों के साथ एक बार फिर मरुस्थल में परंपरा, संस्कृति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिल रहा है। पशुपालन विभाग की ओर से पशु मेला कार्यालय स्थापित कर दिया गया है। यह मेला आगामी 6 नवंबर तक चलेगा। मेले में पशुओं की लगातार आवक जारी है, वहीं देसी-विदेशी पर्यटकों का आना भी शुरू हो गया है।

मेले में अब तक 207 पशु पहुंच चुके हैं, जिनमें 196 ऊंट, 10 घोड़े और एक बैल शामिल हैं। पशु मेला प्रभारी डॉ. सुनील घिया के अनुसार पशुपालक ऊंटों और घोड़ों के साथ डेरा डाल चुके हैं। घोड़ा पालक अपने घोड़ों के लिए अस्थायी और स्थायी अस्तबल तैयार कर रहे हैं। इस बार भी मेला तीन चरणों में आयोजित होगा- पशु मेला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और धार्मिक मेला।
पुष्कर मेला मैदान और उसके आसपास के क्षेत्र में दुकानें सज चुकी हैं। हस्तशिल्प, पारंपरिक आभूषण, कपड़े और ऊंट-सामग्री बेचने वाले व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचे हैं। वहीं, विदेशी सैलानियों की आवाजाही ने मेले में रौनक बढ़ा दी है। अजय रावत द्वारा रेत पर बनाई गई आकर्षक कलाकृतियां भी पर्यटकों का ध्यान खींच रही हैं।

मेले में व्यवस्था बनाए रखने और पशु रोगों के प्रसार को रोकने के लिए विभाग ने सख्त इंतजाम किए हैं. डॉ. घीया के अनुसार, ’24 अक्टूबर से मेले के सभी प्रवेश मार्गों पर पशु चौकियों की स्थापना की जा रही है. इन चौकियों पर आने वाले ऊंट, गाय, भैंस और घोड़े जैसे सभी प्रमुख पशुओं का रजिस्ट्रेशन, अनिवार्य स्वास्थ्य परीक्षण और टैगिंग की जाएगी. विभाग ने इस बार पशु पहचान प्रणाली को सशक्त किया है, जिसके तहत पशुओं का पूरा डेटा डिजिटल रिकॉर्ड में रखा जाएगा. 24 घंटे विभागीय टीमें ड्यूटी पर रहेंगी, ताकि पशुपालकों को कोई समस्या न हो.’
पुष्कर के बाजारों, सरोवर के घाटों और ब्रह्मा मंदिर सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। दीपावली के बाद से ही पुष्कर का माहौल धार्मिक उत्सव में बदल गया है। मेले का विधिवत शुभारंभ 30 अक्तूबर को ध्वजारोहण के साथ किया जाएगा, जिसके बाद सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और प्रतियोगिताओं की शुरुआत होगी।

संयुक्त निदेशक डॉ. सुनील घीया के अनुसार, इन पशु प्रतियोगिताओं की शुरुआत 2 नवंबर को दुग्ध प्रतियोगिता के साथ होगी. अगले दिन, 3 नवंबर को सुबह 9 बजे अश्व वंश नल प्रतियोगिता और 10 बजे गोवंश नल प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसके बाद दोपहर 2 बजे गिर गोवंश नल प्रतियोगिता होगी. 4 नवंबर को दोपहर 12 बजे ऊंट सजाओ प्रतियोगिता और दोपहर 2 बजे नागौरी बैल प्रतियोगिता रखी गई है. मेले के अंतिम चरण में 12 नवंबर को विकास एवं गीर प्रदर्शनी का उद्घाटन किया जाएगा, हालांकि इसका समय अभी घोषित नहीं है, जबकि मेले का औपचारिक समापन 7 नवंबर को होगा
इस बार के मेले की सबसे बड़ी खबर सांस्कृतिक कार्यक्रमों से जुड़ी है. SDM पुष्कर गुरु प्रसाद तंवर ने स्पष्ट किया कि जल संसाधन मंत्री एवं पुष्कर विधायक सुरेश रावत के निर्देशन में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से “वीआईपी कल्चर” पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है. SDM तंवर ने बताया कि पिछले वर्ष कार्यक्रमों के दौरान अव्यवस्था और भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न हुई थी, जिसकी पुनरावृत्ति न हो, इसलिए यह फैसला लिया गया है. अब कार्यक्रमों में दर्शकों को ‘पहले आओ, पहले पाओ’ (First Come, First Served) के आधार पर प्रवेश मिलेगा








