पाली, 30 दिसंबर। राजस्थान अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश (सेनि.) मदनलाल भाटी मंगलवार को पाली जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट सभागार में नगरीय निकायों एवं पंचायती राज संस्थानों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं प्रतिभागियों के साथ प्रत्यक्ष संवाद एवं चर्चा की गई। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि मंडलों ने अध्यक्ष भाटी को ज्ञापन भी प्रदान किए।
अन्य पिछड़ा आयोग अध्यक्ष मदनलाल भाटी ने कहा कि इस जनसंवाद का मुख्य उद्देश्य आयोग की ओर से आमजन से सीधे संवाद स्थापित कर ओबीसी वर्ग से जुड़े क्षेत्रवार मुद्दों, विकास संबंधी आवश्यकताओं, सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों एवं कल्याण से जुड़ी समस्याओं, अपेक्षाओं एवं सुझावों को संकलित करना है, ताकि इनके आधार पर पंचायती राज एवं नगरीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लेकर एक समग्र एवं तथ्यात्मक रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत की जा सके।

आयोग अध्यक्ष ने कहा कि आयोग को माननीय सर्वाेच्च न्यायालय के आदेशों की अनुपालन में राज्य के ग्रामीण एवं शहरी स्थानीय निकायों में सभी स्तरों पर अन्य पिछड़ा वर्ग के पिछड़ेपन की प्रकृति, उसकी तीव्रता एवं उसके प्रभावों का समसामयिक एवं अनुभवजन्य अध्ययन करना है। इस अध्ययन के आधार पर आयोग को पंचायती राज संस्थाओं एवं नगरीय निकायों के निर्वाचन में ओबीसी आरक्षण के संबंध में समयबद्ध अनुशंसाएं राज्य सरकार को प्रस्तुत करनी हैं। भाटी ने कहा कि आयोग का उद्देश्य राजस्थान में सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के समुचित राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। संविधान में समानता का मूलभूत अधिकार है उसकी पूर्ण पालना करवाने के लिए आयोग प्रतिबद्ध है। ओबीसी वर्ग की जिन जातियों का प्रतिनिधित्व कम है उनके संबंध में प्राप्त सुझावों पर आयोग विश्लेषण कर विधिसम्मत रिपोर्ट राज्य सरकार को प्रस्तुत करेगा।

उन्होंने कहा कि आयोग का प्रमुख उद्देश्य राजस्थान में सामाजिक एवं शैक्षिक रूप से पिछड़े वर्गों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करना है। इसके लिए पंचायतीराज एवं शहरी निकायों में ओबीसी वर्ग को आरक्षण प्रदान करने हेतु वैज्ञानिक, तथ्यपरक एवं व्यावहारिक फार्मूला तैयार कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, जिसके आधार पर प्रदेश में आरक्षण लागू किया जाएगा। उन्होंने आयोग के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आयोग अन्य पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक, सामाजिक एवं शैक्षिक उत्थान के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है। आयोग द्वारा प्रदेश में राजनीतिक एवं सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों की पहचान कर उनकी समस्याओं, चुनौतियों एवं आवश्यकताओं का अध्ययन किया जा रहा है, ताकि उनके समाधान के लिए ठोस अनुशंसाएं की जा सकें। आयोग ओबीसी वर्ग की प्रगति का सतत मूल्यांकन भी करेगा। अन्य पिछड़ा वर्ग के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षिक विकास तथा कल्याण के लिए संचालित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है। समाज के पिछड़े वर्गों का संरक्षण एवं सशक्तिकरण शासन की प्राथमिकता होनी चाहिए। खुली परिचर्चा एवं संवाद के दौरान विभिन्न प्रतिभागियों, सामाजिक संस्थाओं, गणमान्य नागरिकों सहित विभिन्न जन प्रतिनिधियों एवं संगठनों के प्रतिनिधियों ने आयोग अध्यक्ष के समक्ष अपने विचार रखे व ज्ञापन प्रस्तुत किए।

इस कार्यक्रम में पंचायती राज एवं नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों के साथ-साथ अतिरिक्त जिला कलक्टर बजरंग सिंह, ओबीसी आयोग पीआरओ विक्रम राठौड़, नगर परिषद आयुक्त नवीन भारद्वाज, पूर्व सभापति महेंद्र बोहरा, सीरवी महासभा के महासचिव भंवर चौधरी, पूर्व उपसभापति मूल सिंह भाटी एवं ललित प्रीतमानी, सुनील भंडारी एवं त्रिलोक चौधरी, पूर्व प्रधान श्रवण कुमार बंजारा, पर्मेंद्र सिंह, हेमंत चौधरी, रफीक चौहान, ओमप्रकाश कच्छवाह, ऐडवोकेट ओम प्रकाश कच्छवाह, सोमनाथ मंडल की नीतू ललित प्रितमानी, राम किशोर साबू,पुखराज पटेल, नारायण कुमावत, शिवप्रकाश पजापत, गोविंद बंजारा भवर राव, राहुल मेवाड़ा, दिलीप चौधरी, पुखराज बंजारा, झालाराम देवासी,राजेंद्र पटेल, देवाराम पटेल महिपाल सिंह चारण चंनदसिह मेवाडा, सुरेश सिसोदिया, गुमान सिंह रावत, भंवर राव, मेवाड़ा समाज से अम्बालाल सोलंकी, अब्दुल रज्जाक सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि व गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।











