भारत के उड्डयन क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने और यात्रियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक अहम कदम उठाया है. सरकार ने उड़ान भरने की तैयारी कर रही दो नई विमानन कंपनियों शंख एयर, अल-हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को परिचालन की मंजूरी दे दी है नागरिक विमानन मंत्रालय की ओर से इन दोनों कंपनियों को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी किया गया है
दरअसल, मौजूदा समय की बात करें तो भारत में मुख्यतः दो ही एयरलाइंस मुकाबले में हैं। इनमें से एक है इंडिगो, जिसके पास पहले ही भारत के 50 फीसदी उड़ान संचालन पर नियंत्रण है। वहीं, दूसरा नाम है एयर इंडिया का, जो कि अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के साथ घरेलू बाजार में भी तेजी से जगह बना रही है।
बीते कुछ वर्षों में हवाई यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ी है, लेकिन नए खिलाड़ियों के प्रवेश में ऊंची लागत, भारी कर्ज और संचालन से जुड़ी चुनौतियां बड़ी बाधा बनी हुई थीं. ऐसे में सरकार का यह कदम घरेलू विमानन क्षेत्र पर मौजूदा कंपनियों के अत्यधिक दबदबे को कम करने और बाजार में संतुलन लाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है
इन दो बड़ी कंपनियों के अलावा स्पाइसजेट, अकासा, अलायंस एयर भारत के घरेलू बाजार में थोड़ी जगह रखते हैं। हालांकि, कुछ अभियानगत दिक्कतों के चलते मौजूदा समय में भारत की विमानन सेवाएं इंडिगो और एयर इंडिया पर ही निर्भर हैं। इसका एक असर हाल ही में इंडिगो की उड़ानें रद्द होने के बाद देखा गया था, जब हजारों की संख्या में यात्री जहां-तहां फंस गए थे। ऐसे में सरकार अब घरेलू हवाई क्षेत्र में प्रतियोगिता बढ़ाने की तैयारी कर चुकी है। इसी के चलते तीन एयरलाइन कंपनियों को मंजूरी भी दी गई है। अब नागर विमानन महानिदेशालय की तरफ से जरूरी निरीक्षण और मानकों की जांच किए जाने के बाद इन एयरलाइंस को जल्द ही भारत के आकाश में देखा जा सकता है।
आसमान में बढ़ेगा प्रतिस्पर्धा
इंडिगो अकेले लगभग 65 प्रतिशत घरेलू बाजार पर काबिज है, जबकि एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस के साथ मिलकर यह नियंत्रण करीब 90 प्रतिशत तक पहुंच जाता है. नए खिलाड़ियों के आने से न केवल प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि टिकट कीमतों में संतुलन, सेवा की गुणवत्ता में सुधार और यात्रियों के लिए बेहतर विकल्प भी सामने आने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, AI Hindi Air, FlyExpress और Shankh Air जैसी नई कंपनियों की एंट्री से आने वाले वर्षों में भारतीय आसमान में प्रतिस्पर्धा तेज होने और विमानन उद्योग को नई रफ्तार मिलने की संभावना है







