राजस्थान में सरकारी योजना के तहत दिए जाने वाले कफ सिरप को पीने से बच्चों की मौत और बीमार होने पर राजस्थान के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता राजेंद्र राठौड़ ने सवाल उठाया है हालांकि राजस्थान के स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा है कि दवा बिलकुल सही है, और इसकी जांच करवा ली गई है
राजेंद्र राठौड़ ने एक मिडिया चेनल से बात करते हुए कहा कि वह 8 साल स्वास्थ्य मंत्री रहे हैं और उनके मन में अभी जो हो रहा है उसे देखकर पीड़ा हो रही है. उन्होंने कहा,”दवा का बनना, दवा का फैक्ट्री से निकलना, दवा का विभिन्न एजेंसियों द्वारा सर्टिफिकेट जारी करना, और उसके बाद दवा से इस तरह से बच्चों की मौत हो जाना एक बहुत गंभीर बात है, और इसके बाद ये कहना कि दवा मानक स्तर की थी, ये कहीं ना कहीं सिस्टम में कमी को दिखाता है.”
राठौड़ ने कहा कि इस तरह की घटनाओं पर पर्दा नहीं डालना चाहिए और कार्रवाई की जानी चाहिए. उन्होंने कहा,”जिस भी लैब ने इस लैब को मान्यता दी, और इससे एक महीने पहले इस दवा कंपनी में सॉल्ट की मात्रा शून्य पाई गई थी तभी उसे ब्लैकलिस्ट कर दिया जाना चाहिए था. ये क्यों नहीं हुआ इसकी जांच होनी चाहिए.”
पूर्व मंत्री ने कहा कि यह मुद्दा इसलिए गंभीर है क्योंकि यह सरकारी मुफ्त दवा की योजना राजस्थान की सबसे बड़ी योजना है. उन्होंने कहा,”ऐसे में एक दवा की इस तरह से शिकायत पाए जाने से लोगों के मन में सभी दवाओं को लेकर संदेह पैदा होगा. इसलिए इसकी जांच की जानी चाहिए.”
राजेंद्र राठौड़ ने इससे पहले आज अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर भी एक पोस्ट में इसे लेकर सवाल उठाया. इसमें राठौड़ ने लिखा – “राजस्थान में खांसी की सिरप पीने से कई मासूम बच्चों की मौत की घटनाएं बेहद दुखद और चिंताजनक हैं. जिस केयसंस फार्मा कंपनी की सिरप से बच्चों की मौत हुई उसे पहले भी कई बार ब्लैकलिस्टेड किया जा चुका है. प्रदेश में नकली दवाओं को लेकर ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट,1940 बना हुआ है. इसके अनुसार यदि किसी दवा में बताए गए 3-4 रसायनों (सॉल्ट्स) में से एक भी जांच में अनुपस्थित पाया जाता है तो उस दवा को नकली माना जाएगा. सबसे गंभीर बात यह है कि फूड सेफ्टी ड्रग कंट्रोलर डिपार्टमेंट ने ड्रग एंड कॉस्मेटिक एक्ट, 1940 की परिभाषा तक बदल दी गई ताकि दोषी कंपनियों को बचाया जा सके.”
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