सुप्रीम कोर्ट सख्त, मारवाड़ की नदियों की बदहाली पर राजस्थान सरकार को लगाई फटकार

सुप्रीम कोर्ट सख्त, मारवाड़ की नदियों की बदहाली पर राजस्थान सरकार को लगाई फटकार

पश्चिमी राजस्थान की पहचान मानी जाने वाली नदियां अब अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित ‘हाई-लेवल इकोसिस्टम ओवरसाइट कमेटी’ ने अपनी 202 पन्नों की अंतरिम रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. औद्योगिक कचरे और अनुपचारित सीवरेज के कारण लूनी, बांडी और जोजरी नदियां गंभीर रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं, जिसका सीधा असर जनजीवन और खेती पर पड़ रहा है.

जोधपुर की जोजरी में समा रहा शहर का गंदा पानी

जोधपुर की जोजरी नदी की स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया गया है. शहर में रोजाना लगभग 230 मिलियन लीटर सीवेज आसपास की लगी फैक्ट्रियो के कारण पैदा होता है. यहां लगे ट्रीटमेंट प्लांट की शोधन क्षमता केवल 175 मिलियन लीटर प्रतिदिन है.  इस कारण तकरीबन 55  मिलियन लीटर बड़ी मात्रा में सीवेज (गंदा पानी) रोजाना बिना ट्रीट किया गया सीधे नदी में पहुंचा है, जिसके कारण इस नदी में प्रदूषण री स्थिति बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच चुकी है.हालांकि, प्रशासन ने 23.81 करोड़ रुपये की लागत से 23 किमी लंबी नई पाइपलाइन बिछा रहा है, जिसे मई 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है. हाल ही में ड्रोन सर्वे के जरिए 142 अवैध वाशिंग टैंक भी ध्वस्त किए गए हैं.

पाली के नेहड़ा डैम में जमा हुआ 6 फीट जहरीला कचरा

पाली जिले में बांडी नदी और उससे जुड़े सीईटीपी प्लांट की स्थिति भी रिपोर्ट में गंभीर बताई गई है. कमेटी के अनुसार सीईटीपी-4 में करीब 1500 मीट्रिक टन और सीईटीपी-6 में लगभग 4500 मीट्रिक टन खतरनाक सूखा कचरा खुले में जमा पाया गया. सीईटीपी-6 से करीब 280 औद्योगिक इकाइयां जुड़ी हुई हैं.

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने साल 2017 में इस प्लांट को सीमित अवधि के लिए अनुमति दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद 5 साल बीत जाने के बाद भी अपशिष्ट परिवहन की गतिविधियां जारी है. जिसके कारण नदी में कूड़े का भंडार लग गया है.  पाली के नेहड़ा डैम में पूर्व सर्वेक्षण के दौरान 5 से 6 फीट तक जहरीला स्लज जमा पाया गया था. जिसे लेकर स्थानीय किसानों ने कमेटी को बताया कि इस प्रदूषित पानी के कारण उनकी फसलें गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं. जिससे उत्पादन में भारी गिरावट आई है.

बालोतरा की लूनी नदी और अवैध डिस्चार्ज

कमेटी को बालोतरा इलाके में लूनी नदी की जांच के दौरान भी कई गड़बड़ियां मिलीं. उन्होंने बताया कि यहां के STP (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट) को राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड से काम करने की परमिशन नहीं मिली थी. इस वजह से, जेरला नाले से छोड़े जा रहे गंदे पानी से मंडापुरा इलाके के आसपास की करीब 800 बीघा चरागाह की जमीन खराब हो गई है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि यहां चल रहे अलग-अलग इंडस्ट्रियल एरिया के इंस्पेक्शन के दौरान, कई यूनिट्स ने पॉल्यूशन कंट्रोल के नियम नहीं माने गए. इससे लोकल पानी के सोर्स की क्वालिटी पर असर पड़ा है.

सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्य सरकार को फटकार

जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की सुस्त कार्यप्रणाली पर गहरी नाराजगी व्यक्त की. कोर्ट ने कहा कि कमेटी को जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए, जो कि गंभीर लापरवाही है. अदालत ने सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि कमेटी के काम में आने वाली हर बाधा को तुरंत दूर किया जाए।इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 17 मार्च को होगी, जिसमें कमेटी द्वारा दिए गए तथ्यों पर सरकार को जवाब देना होगा.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Feedback Form

Name *
Email *
Phone *
Feedback Message

Membership Form

Name *
Email *
MOBILE *
Upload Aadhar (front side) *
Maximum file size: 10 MB
Upload Aadhar (Back Side) *
Maximum file size: 10 MB
Photo *
Maximum file size: 10 MB
Message

Advertise Your Business with Us

Name *
Email *
Phone *
Message

Our Payment Details

Bank Details

Bank Name:- 

A/C Name:- 

A/C Number:- 

IFSC Code:- 

QR Code

Scan This Code to Pay

Reporter Joining Form

Name *
Email *
MOBILE *
Upload Aadhar (front side)
Maximum file size: 10 MB
Upload Aadhar (Back side)
Maximum file size: 10 MB
Photo *
Maximum file size: 10 MB
Message