संसद के शीतकालीन सत्र के पहले दिन विपक्ष ने एसआईआर समेत कई मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए जमकर हंगामा किया, जिसकी वजह से पहला दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया. ऐसे में अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि मंगलवार (2 नवंबर 2025) को भी संसद में एसआईआर का मुद्दा हावी रहने वाला है. संसद सत्र शुरू होने से पहले रविवार (30 नवंबर 2025) को सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों ने संकेत दिया कि वे सत्र के दौरान एसआईआर मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएंगे और कार्यवाही के बाधित होने की जिम्मेदारी सरकार पर होगी
किरेन रिजिजू (संसदीय कार्य मंत्री): “SIR पर चर्चा की विपक्ष की मांग सरकार के विचाराधीन है. इसे अस्वीकार नहीं किया गया है. सरकार SIR, चुनाव सुधारों सहित किसी भी विषय पर चर्चा करने के खिलाफ नहीं है, जवाब देने के लिए कुछ समय दिया जाए. एसआईआर चुनाव सुधारों पर चर्चा के लिए समय सीमा पर कोई शर्त न रखें
संजय झा (जेडीयू सांसद): “पिछला सत्र भी एसआईआर के मुद्दे पर ही बर्बाद हो गया था. उस समय बिहार में एसआईआर प्रक्रिया चल रही थी. चुनाव आयोग ने सभी दलों से कहा था कि अगर प्रक्रिया में कोई असमानता हो तो वे अपनी शिकायत दर्ज कराएं, लेकिन किसी भी दल ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई
प्रियंका गांधी (कांग्रेस सांसद): “चुनावी स्थिति और प्रदूषण बड़े मुद्दे हैं. आइए इन पर चर्चा करें. संसद किस लिए है? यह नाटक नहीं है. मुद्दों पर बोलना और उन्हें उठाना नाटक नहीं है. नाटक का मतलब है जनता से जुड़े मुद्दों पर लोकतांत्रिक चर्चा की अनुमति न देना
अखिलेश यादव (सांसद समाजवादी पार्टी): “एसआईआर की चिंता आज वास्तविक होती जा रही है. अगर वोट कट जाएगा तो कोई व्यक्ति अपने सपने कैसे पूरे करेगा? अभी जो SIR चल रहा है वो लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि वोट काटने के लिए है. जमीनी स्तर पर BLO फॉर्म भी नहीं भर पा रहे हैं. उनमें से कई तनाव में हैं. जब यूपी में तुरंत चुनाव नहीं हैं तो यह जल्दबाजी क्यों?”










