बांग्लादेश में युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हिंसा भड़क गई है। राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में भीड़ आगजनी और हिंसक प्रदर्शन कर रही है। बांग्लादेश में जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है, हालात दयनीय होते जा रहे हैं. हिंसा और अराजकता की स्थिति चरमसीमा पार कर चुकी है. ढाका सहित कई जिलों में हत्या और आगजनी की घटनाएं देखने को मिल रही हैं. देशभर में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा में भी इजाफा हुआ है. मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला में भीड़ ने एक हिंदू युवक की हत्या कर दी

हिंसक प्रदर्शनों में एक हिंदू व्यक्ति की पीट-पीटकर की गई हत्या के बाद अंतरिम सरकार ने बयान जारी किया है। यूनुस सरकार ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों की ओर से की जा रही हिंसा का सभी बांग्लादेशी नागरिक विरोध करें। उन्होंने हिंसा में मारे गए हिंदू शख्स की हत्या की भी निंदा की।
स्थानीय मीडिया के अनुसार युवक पर इस्लाम का अपमान करने का आरोप था. इससे भी भयावह यह है कि युवक की हत्या के बाद उसके शव को आग लगा दी गई. इस घटना के बाद से इलाके में तनाव बढ़ गया. इसकी वजह से ढाका-मैमनसिंह हाईवे पर कुछ देर के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया. यह हिंसा गुरुवार (18 दिसंबर 2025) रात को उपजिला के स्क्वायर मास्टरबाड़ी इलाके में पायनियर निट कम्पोजिट फैक्ट्री में हुई
मरने वाले हिंदू युवक की पहचान दीपू चंद्र दास (30) के तौर पर हुई है. दीपू फैक्ट्री में काम करता था और मैमनसिंह के तारकंडा उपजिला का रहने वाला था स्थानीय सूत्रों के हवाले से, बांग्लादेशी बंगाली मीडिया आउटलेट बार्टा बाजार ने बताया कि दीपू पर वर्ल्ड अरेबिक लैंग्वेज डे पर फैक्ट्री में हुए एक इवेंट के दौरान इस्लाम और पैगंबर मुहम्मद के बारे में गलत कमेंट करने का आरोप था. गुस्साई भीड़ ने उसे पीटा और उसकी मौके पर ही मौत हो गई
हिंदू व्यक्ति की मॉब लिंचिंग की यूनुस सरकार ने की निंदा
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने एक बयान में कहा कि नए बांग्लादेश में ऐसी हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। बयान में आगे कहा गया है कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। बांग्ला ट्रिब्यून समाचार पोर्टल की रिपोर्ट के अनुसार, मयमनसिंह शहर में गुरुवार को कथित ईशनिंदा के आरोप में दीपू चंद्र दास नामक एक हिंदू शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। भीड़ ने हत्या करने के बाद उसके शव को आग लगा दी।

मुख्य सलाहकार की मीडिया टीम की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ‘हम हिंसा, धमकी, आगजनी और संपत्ति को नष्ट करने के सभी कृत्यों की कड़ी और स्पष्ट रूप से निंदा करते हैं।’ बयान में कहा गया है, ‘इस नाजुक घड़ी में, हम प्रत्येक नागरिक से हिंसा, उकसावे और नफरत को अस्वीकार करके और उनका विरोध करके हादी का सम्मान करने का आह्वान करते हैं।
पेड़ से बांधकर युवक के शव को जलाया
रिपोर्ट्स के अनुसार, युवक की मौत के बाद हालात और खराब हो गए. भीड़ शव को स्क्वायर मास्टरबाड़ी बस स्टैंड इलाके में ले गई, उसे रस्सी से एक पेड़ से बांध दिया और नारे लगाते हुए उसमें आग लगा दी. हिंसा और कट्टरपंथ की ये कहानी यहीं खत्म नहीं हुई. मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना में भीड़ ने शव को ढाका-मैमनसिंह हाईवे पर ले जाकर फिर से उसमें आग लगा दी, जिससे ट्रैफिक में रुकावट आई और स्थानीय लोगों में डर फैल गया.
भालुका उपजिला के एग्जीक्यूटिव ऑफिसर मोहम्मद फिरोज हुसैन ने कहा कि पैगंबर का अपमान करने के आरोप में एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई. बांग्लादेश के पूर्व मंत्री और अवामी लीग के नेता मोहम्मद अली अराफात ने इस घटना की कड़ी निंदा की और कहा कि अंतरिम सरकार के चीफ एडवाइजर मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में बांग्लादेश लगातार बड़े पैमाने पर कट्टरपंथ की ओर बढ़ रहा है

अखबारों के दफ्तरों पर हमले की भी की निंदा
बयान में कहा गया, ‘यह हमारे राष्ट्र के इतिहास का एक महत्वपूर्ण क्षण है जब हम एक ऐतिहासिक लोकतांत्रिक परिवर्तन से गुजर रहे हैं। हम इसे उन कुछ लोगों की ओर से पटरी से उतरने नहीं दे सकते और न ही देना चाहिए जो अराजकता पर पनपते हैं और शांति को नकारते हैं।’ यूनुस सरकार की ओर से जारी बयान में मीडिया संस्थानों पर हुए हमलों की भी निंदा की गई है। बयान में कहा गया है कि मीडिया संस्थानों पर हमला स्वतंत्र मीडिया पर हमले के समान है। यह घटना देश की लोकतांत्रिक प्रगति और स्वतंत्र पत्रकारिता के मार्ग में एक बड़ा रोड़ा बन गई है।
इसमें कहा गया है कि आगामी चुनाव और जनमत संग्रह महज राजनीतिक कवायद नहीं हैं। ये एक गंभीर राष्ट्रीय प्रतिबद्धता हैं। अगले साल 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों में उम्मीदवार उस्मान हादी की हमले के छह दिन बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। हादी पिछले साल के जुलाई विद्रोह के प्रमुख नेताओं में से एक थे और शेख हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से बेदखल करने वालों में शामिल थे। पिछले साल अगस्त में सत्ता से बेदखल होने के बाद बांग्लादेश से भागकर आई शेख हसीना फिलहाल भारत में हैं।











