लोकसभा में वंदे मातरम् पर बहस; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा, ‘कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता किया’

लोकसभा में वंदे मातरम् पर बहस; प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा, ‘कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता किया’

लोकसभा में वंदे मातरम् पर बहस के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने पूर्व पीएम जवाहरलाल नेहरू पर राष्ट्रीय गीत के प्रति मुहम्मद अली जिन्ना की सोच को सपोर्ट करने का आरोप लगाया. चर्चा की शुरुआत करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि नेहरू ने एक बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस को लिखा था कि वंदे मातरम् मुसलमानों को भड़का और चिढ़ा सकता है और इसके इस्तेमाल पर विचार करने का सुझाव दिया था

प्रधानमंत्री ने कहा, “जिन्ना के विरोध के 5 दिन बाद ही 20 अक्टूबर को जवाहरलाल नेहरू ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को चिट्ठी लिखी और जिन्ना की भावना से सहमति जताते हुए लिखा कि वंदे मातरम् की आनंदमठ वाली पृष्ठभूमि मुसलमानों को भड़का सकती है. इसके बाद कांग्रेस का बयान आया कि 26 अक्टूबर को कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक कोलकाता में होगी, जिसमें वंदे मातरम् के उपयोग की समीक्षा की जाएगी

पीएम मोदी ने कहा, “वंदे मातरम् के प्रति मुस्लिम लीग की विरोध की राजनीति तेज होती जा रही थी. मोहम्मद अली जिन्ना ने लखनऊ से 15 अक्टूबर 1937 को वंदे मातरम् के खिलाफ नारा बुलंद किया. फिर कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष जवाहरलाल नेहरू को अपना सिंहासन डोलता दिखा. जवाहरलाल नेहरू ने मुस्लिम लीग के आधारहीन बयानों को करारा जवाब देने और निंदा करने की बजाय उल्टा वंदे मातरम् की पड़ताल शुरू कर दी

उन्होंने कहा, “पूरे देश में इस प्रस्ताव के विरोध में लोगों ने प्रभात फेरियां निकालीं, लेकिन दुर्भाग्य से 26 अक्टूबर को कांग्रेस ने वंदे मातरम् पर समझौता कर लिया, वंदे मातरम् के टुकड़े कर दिए. उस फैसले के पीछे नकाब यह पहना गया कि यह सामाजिक सद्भाव का काम है, लेकिन इतिहास गवाह है कि कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के आगे घुटने टेक दिए. हिंदुस्तान में रहने वाले हर शख्स को तिरंगे के आगे झुकना होगा

पीएम मोदी ने कहा, “एक समय था जब बंगाल की बौद्धिक शक्ति पूरे राष्ट्र का मार्गदर्शन और प्रेरणा करती थी. अंग्रेज समझते थे कि बंगाल की शक्ति ही भारत की शक्ति का केंद्र बिंदु है इसीलिए उन्होंने सबसे पहले बंगाल को विभाजित करने का प्रयास किया. उनका मानना ​​था कि अगर बंगाल टूटा तो राष्ट्र भी टूट जाएगा. 1905 में अंग्रेजों ने बंगाल का विभाजन कर दियालेकिन वंदे मातरम् चट्टान की तरह अडिग रहा. बंगाल की एकता के लिए वंदे मातरम् एक गूंजती हुई पुकार बन गया, जो गली-गली गूंजती रही

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