विदेश मंत्रालय ने मंगलवार (2 दिसंबर 2025) को श्रीलंका के लिए राहत सामग्री ले जाने वाले विमानों के लिए उड़ान मंजूरी में देरी के संबंध में पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि पाकिस्तान ने यह बयान जनता को गुमराह करने और भारत की ओर से किए गए कामों को गलत तरीके से पेश करने के उद्देश्य से दिया है. उन्होंने कहा, “हम पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की ओर से किए गए हास्यास्पद बयान को अस्वीकार करते हैं, जो भारत विरोधी दुष्प्रचार फैलाने का एक और प्रयास है.”
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को राजनयिकों के जरिए पाकिस्तान का अनुरोध पहले ही मिल गया था और कुछ ही घंटों में उसे जवाब दे दिया गया था. विदेश मंत्रालय ने प्रवक्ता ने कहा, “पाकिस्तान का औपचारिक अनुरोध 1 दिसंबर 2025 को दोपहर करीब 1 बजे इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग को मिला था. सरकार ने इसे मानवीय आपात स्थिति मानते हुए उसी दिन शाम 5:30 बजे मंजूरी जारी कर दी थी.
रणधीर जायसवाल ने कहा, “भारत प्राकृतिक आपदाओं और राहत कार्यों के दौरान श्रीलंका के साथ खड़ा है. भारत इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी उपलब्ध साधनों के माध्यम से श्रीलंका के लोगों की सहायता के लिए प्रतिबद्ध है.” भारत की ओर से तुरंत एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी मिलने के बाद भी पाकिस्तान भारत पर आरोप लगाता रहा.
पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट कर कहा, “पाकिस्तान ने श्रीलंका जाने वाली मानवीय सहायता को भारत लगातार रोक रहा है. उसके अलावा आरोप लगाया कि उसका एक विमान एयरस्पेस में घुसने के लिए 60 घंटे से इंतजार कर रहा है.
श्रीलंका चक्रवात दितवाह के कारण व्यापक बाढ़, भूस्खलन और बुनियादी ढांचे को हुए नुकसान से जूझ रहा है, जिससे कई जिले अलग-थलग पड़ गए हैं और देश की आपदा-प्रतिक्रिया क्षमता पर भारी दबाव पड़ा है. भारत ने चक्रवात से हुई तबाही से उबरने में श्रीलंका की मदद के लिए ऑपरेशन सागर बंधु शुरू किया है.
श्रीलंका के आपदा प्रबंधन केंद्र (डीएमसी) ने 16 नवंबर से अब तक, चक्रवात के कारण आई विनाशकारी बाढ़ और भूस्खलन में मंगलवार सुबह तक कम से कम 410 लोगों की मौत और 336 लोगों के लापता होने की पुष्टि की है







