ट्रेड डील को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि यह भारत यूरोपियन यूनियन रिश्तों में एक नए युग का शंखनाद है. इस दौरान पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों की खूब आलोचना की. पीएम मोदी ने कहा कि आज दुनिया में ट्रेड, टेक्नोलॉजी और रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल हथियार की तरह किया जा रहा है. डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों से ग्लोबल ट्रेड में उथल-पुथल होने के साथ-साथ नया ग्लोबल ऑर्डर भी बनता नजर आ रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप अभी ग्रीनलैंड को किसी भी हालत में कब्जा करने की धमकी दे रहे हैं, जिस वजह से अमेरिका और यूरोपीय देशों के बीच दूरी बढ़ गई है. ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड में मौजूद रेयर अर्थ मिनरल्स पर है. दावोस से सभी यूरोपीय देशों ने मिलकर ट्रंप की टैरिफ धमकी का करारा जवाब भी दिया था. ट्रंप के 10 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी के जवाब में यूरोप ने ‘ट्रेड बाजूका’ लगाने की धमकी दी थी
पीएम मोदी ने कहा, ‘पहली बार यूरोपियन यूनियन के लीडर्स, उनका भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना, दोनों के बीच इतिहास का सबसे बड़ा FTA संपन्न होना और आज इतने सारे CEOs के साथ इतने बड़े लेवल पर इंडिया-यूरोपियन यूनियन बिजनेस फॉरम आयोजित होना… ये सब उपलब्धियां विश्व के दो सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों के बीच हो रहे अभूतपूर्व एलाइनमेंट का प्रतीक है
पीएम मोदी ने कहा, ‘यूरोपीय संघ में भारतीय निवेश करीब 40 अरब यूरो तक पहुंच चुका है. भारत और यूरोपीय कंपनियों के बीच अनुसंधान एवं विकास (R&D), मैन्युफैक्चरिंग, सर्विस सहित हर क्षेत्र में गहरा सहयोग है. हम विश्व की सबसे प्रभावशाली साझेदारियों में से स्थापित कर रहे हैं और इसके नतीजे भी हमें साफ दिख रहे हैं. पिछले 10 वर्षों में हमारा व्यापार दोगुना होकर 180 बिलियन यूरो तक पहुंच गया है. भारत में 6 हजार से अधिक यूरोपीय कंपनियां काम कर रही हैं.’
पीएम मोदी ने कहा, ‘ग्रीन हाइड्रोजन से लेकर सोलर एनर्जी… हर क्षेत्र में हमें ज्वाइंट रिसर्च एंड इनवेस्टमेंट बढ़ाना चाहिए. इसके साथ साथ जल प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी और स्थायी कृषि हर क्षेत्र में मिलकर सॉल्यूशन डेवलप करना चाहिए
पीएम मोदी ने कहा, ‘मुझे पूरा विश्वास है कि आप सभी मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का पूरा लाभ उठाएंगे. आज ट्रेड, टेक्नोलॉजी और रेअर मिनरल्स का दुनियाभर में हथियारों के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. क्या हमारे व्यापारिक समुदाय मिलकर इलेक्ट्रिक वाहनों, बैटरी और चिप्स जैसे क्षेत्रों में बाहरी निर्भरता को कम कर सकते हैं? क्या हम मिलकर एक विश्वसनीय और भरोसेमंद वैकल्पिक सप्लाई चेन का निर्माण कर सकते हैं?









