भारतीय चुनाव आयोग ने 4 नवंबर से 9 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में अपने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का दूसरा फेज़ शुरू किया था. इस कैंपेन का मकसद वोटर लिस्ट को अपडेट करना था, इसके साथ ही, इस दौरान 51 करोड़ वोटर्स की एलिजिबिलिटी को भी वेरिफाई किया जाना था लेकिन बीते 16 दिनों में 28 BLO की मौतो से सियासी संग्राम मच गया है
राजस्थान, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और केरल में कुछ BLO खुदकुशी कर रहे हैं, तो किसी की हार्ट अटैक से मौत हो रही है. BLO की मौतों का मामला इतना बढ़ गया है कि इसने सियासी संग्राम का रूप ले लिया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को मौतों का जिम्मेदार ठहराया
BLO की मौत पर डोटासरा का सवाल- आखिर सरकार इतना दबाव क्यों बना रही है ?
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के बाद अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी बीएलओ की मौत को लेकर चुनाव आयोग और सरकार पर हमला बोला है. डोटासरा ने कहा कि सरकार को इतनी क्या जल्दी है कि बीएलओ पर अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है.
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डोटासरा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि राजस्थान में पहले जयपुर में बीएलओ मुकेश जांगिड़ की आत्महत्या और अब सवाईमाधोपुर में बीएलओ हरीओम बैरवा की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार के असहनीय दबाव, सस्पेंशन की धमकी और तानाशाही रवैए के कारण बीएलओ भारी दबाव महसूस कर रहे हैं. मृतक बीएलओ के परिवारों ने भी सरकारी व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन शर्म की बात है कि भाजपा सरकार न्याय मांग रहे परिवार को ‘नेचुरल डेथ’ बताकर पल्ला झाड़ रही है

बीते 16 दिनों में कहां-कहां और कितने BLO की मौतें हुईं?
19 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ट्वीट कर के कहा, ‘SIR शुरू होने से अब तक 28 लोग मर चुके हैं. चुनाव आयोग का यह अमानवीय दबाव बंद हो. पहले यह काम 3 साल में होता था, अब 2 महीने में करवा रहे हैं. तुरंत SIR रोको वरना और जानें जाएंगी.’
( मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 20 नवंबर 2025 की दोपहर 2 बजे तक कुल 7 BLO की मौतें दर्ज हुईं… )
- राजस्थान के सवाई माधोपुर के बहरावंडा खुर्द गांव में 34 साल के BLO हरिओम बैरवा की हार्ट अटैक से मौत हो गई. हार्ट अटैक से 5 मिनट पहले उन्हें तहसीलदार जयप्रकाश रोलन ने फोन किया था. फोन रखने के बाद हरिओम को अटैक आया. परिजनों का आरोप है कि अधिकारी उन पर दबाव बना रहे थे. ऐसे में वह टेंशन में थे और घर पर किसी से ज्यादा बात भी नहीं करते थे. काम के दबाव के चलते उन्हें दिल का दौरा पड़ा
- राजस्थान के धर्मपुरा के BLO मुकेश चंद जांगिड़ ने रविवार सुबह ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी थी. जेब से मिले सुसाइड नोट में उन्होंने अपने सुपरवाइजर सीताराम बुनकर पर गंभीर आरोप लगाए हैं. मुकेश ने लिखा कि उन्हें नौकरी से सस्पेंड करने की धमकी देकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था. आरोप है कि जयपुर में SIR की ड्यूटी के बोझ और सीनियर के असहयोग से परेशान थे
- गुजरात के कपड़वंज के नवापुरा प्राथमिक विद्यालय के प्रिसिंपल रमेशभाई परमार की BLO ड्यूटी के दौरान हार्ट अटैक से मौत हो गई. उनके परिवार का कहना है कि उन पर SIR का असहनीय कार्यभार था और वह ड्यूटी की वजह से बहुत ज्यादा ट्रैवल कर रहे थे. उनके BLO कार्य का स्थान उनके स्कूल से 48 किलोमीटर दूर था. उन्हें रोजाना 94 किलोमीटर से ज्यादा का सफर करना पड़ता था
- पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी के मालबाजार क्षेत्र में 48 साल की शांतिमणि इक्का ने आत्महत्या कर ली. परिवार को घर के आंगन में उनका शव मिला. परिवार ने आरोप लगाया कि SIR के दबाव की वजह से शांतिमणि ने खुदकुशी की है. वह रंगमती पंचायत की निवासी थीं और उन्हें हाल ही में BLO के रूप में SIR की ड्यूटी सौंपी गई थी. वह घर-घर जाकर फॉर्म बांट और इकट्ठा कर रही थीं
- मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले के उदयगढ़ जनपद पंचायत के ग्राम सोलिया में एक BLO भुवान सिंह चौहान की निलंबन के बाद मौत हो गई. उन्हें 18 नवंबर को झाबुआ जिला निर्वाचन अधिकारी ने कार्य में लापरवाही के आरोप में निलंबित किया था. परिवार के मुताबिक, निलंबन के बाद भुवान सिंह चौहान काफी तनाव में थे. उन्होंने रात भर खाना नहीं खाया और सो नहीं पाए. बुधवार को उन्हें अचानक चक्कर आए और वे गिर पड़े. परिजन उन्हें तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोरी ले गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया
- केरल के कंकोल-अलप्पादंबा ग्राम पंचायत के एट्टुकुडुक्का स्थित घर में 41 साल के BLO अनीश जॉर्ज ने आत्महत्या कर ली. उनके घर में शव मिला. अनीश के लिए प्रदर्शन कर रहे संगठनों ने आरोप लगाए कि अनीश SIR के काम के बोझ से काफी तनाव में थे और इसी वजह से खुदकुशी की
- पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दनवान जिले के मेमारी सामुदायिक ब्लॉक में महिला BLO की ब्रेन स्ट्रोक से मौत हो गई. महिला के पति ने आरोप लगाए कि वह SIR के काम की वजह से तनाव में थी
राज्यों के आंकड़ों के मुताबिक, 6-7 मौतें हुई हैं, जबकि ममता बनर्जी ने 28 मौतों का आंकड़ा दिया है. इसे लेकर पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है. या फिर ममता बनर्जी का राजनीतिक बयान हो सकता है. लेकिन राजस्थान से लेकर केरल तक BLO की मौतों ने सियासी उथल-पुथल मचा दी है. ममता बनर्जी ने ट्वीट कर के कहा, ‘भारतीय चुनाव आयोग के अनियोजित और अथक कार्यभार से अनमोल जानें जा रही हैं.
एक प्रक्रिया जो पहले 3 साल में पूरी होती थी, अब राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए चुनाव से ठीक पहले 2 महीने में पूरी की जा रही है. इससे BLO पर अमानवीय दबाव पड़ रहा है
BLO की मौत का मामला सियासी संग्राम कैसे बन गया?
राजस्थान के मुकेश की आत्महत्या के बाद प्रदेशभर में BLO ने मिलकर कैंडल मार्च निकाला और शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदेशभर में SIR का काम कर रहे BLO ने सरकारी अधिकारियों पर टॉर्चर करने का आरोप लगाया. महासंघ एकीकृत के प्रदेशाध्यक्ष गजेंद्र सिंह राठौड़ का कहना है कि यह केवल एक कर्मचारी की आत्महत्या नहीं, बल्कि अधिकारियों की निरंकुशता का परिणाम है. जब तक दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक महासंघ अपनी लड़ाई जारी रखेगा
‘BLO की मौतें होना गंभीर विषय है, लेकिन असल लड़ाई वोटर लिस्ट साफ करने पर है BJP का आरोप है कि बंगाल में लाखों फेक और घुसपैठिए वोटर हैं, जो TMC को वोट देते हैं. SIR से ये पकड़े जा रहे हैं, इसलिए TMC SIR रोकना चाहती है. तो वहीं, TMC आरोप लगाती है कि SIR से असली भारतीय वोटरों (खासकर मतुआ, आदिवासी, गरीब) के नाम कट रहे हैं और यह BJP की 2026 चुनाव जीतने की साजिश है. BLO मौतों को दोनों पक्ष अपने- अपने तरीके से इस्तेमाल कर रहे हैं. TMC कहती है चुनाव आयोग अमानवीय है, BJP कहती है TMC गुंडागर्दी कर रही है. इस वजह से BLO की मौतों ने राजस्थान से लेकर पश्चिम बंगाल तक सियासी संग्राम मचाया
BLO कौन होते हैं और इनका मुख्य काम क्या होता है?
बूथ लेवल ऑफिसर यानी BLO ज्यादातर सरकारी कर्मचारी होते हैं. जैसे स्कूल टीचर, आंगनवाड़ी वर्कर, क्लर्क या अन्य सरकारी विभाग के लोग. ये चुनाव आयोग के सबसे निचले स्तर के प्रतिनिधि होते हैं. इनकी नियुक्ति असेंबली क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) करते हैं. यह अपने बूथ के 1,000-1,500 वोटरों की पूरी जिम्मेदारी संभालते हैं.
BLO का मुख्य काम वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा और सही रखना होता है. यह घर-घर जाकर वोटरों की डिटेल चेक करते हैं, नए वोटरों को नाम जोड़ते हैं, मरे हुए या शिफ्ट हो चुके लोगों का नाम हटाते हैं, वोटर कार्ट में सुधार कराते हैं और चुनाव के समय वोटर स्लिप बांटते हैं. यह पूरे साल काम करते हैं, लेकिन रिवीजन के समय काम बहुत बढ़ जाता है











