भारत ने पड़ोसी देशों को कितनी सहायता राशि आवंटित की है? दूरदराज के देशों और क्षेत्रों के लिए भारत ने कितनी रकम बजट में तय की है? आइये जानते हैं…

भारत ने पड़ोसी देशों को कितनी सहायता राशि आवंटित की है? दूरदराज के देशों और क्षेत्रों के लिए भारत ने कितनी रकम बजट में तय की है? आइये जानते हैं…

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2026-27 के लिए बजट का एलान कर दिया है। इसमें भारत के पड़ोसी और अन्य सहयोगी देशों के लिए वित्तीय सहायता की भी घोषणा की गई है। भूटान से लेकर श्रीलंका और बांग्लादेश से लेकर अफ्रीकी देशों तक की मदद के लिए राशि का एलान किया गया है। हालांकि, इस बजट में एक चौंकाने वाली बात यह रही कि चाबहार बंदरगाह के लिए सहयोग राशि वाली पंक्ति को 2026-27 के लिए खाली छोड़ा दिया गया। ऐसे में चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत की भूमिका को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

आइये जानते हैं भारत ने किस देश को कितनी राशि दी और यह पिछली बार के मुकाबले कितनी है…

  • मंगोलिया के बजट में सबसे बड़ी उछाल (5 गुना वृद्धि) देखी गई है।
  • लातिन अमेरिकी देशों के लिए आवंटन को सीधे दोगुना कर दिया गया है। सरकार इसके जरिए दक्षिण अमेरिका में अपने संबंधों को प्रगाढ़ करने पर जोर दे रही है।
  • भूटान को मिलने वाली सहायता राशि में मूल्य (Value) के मामले में सबसे बड़ी वृद्धि (₹138.56 करोड़) हुई है, हालांकि प्रतिशत के लिहाज से यह 6.44% है।
  • अफ्रीकी देशों (₹225 करोड़) और सेशेल्स (₹19 करोड़) के बजट में कोई बदलाव नहीं किया गया है, यानी यह पिछले वर्ष के बराबर पर ही स्थिर है।

बजट में किन देशों की मदद घटाई गई?

बांग्लादेश: प्रतिशत के मामले में सबसे बड़ी कटौती बांग्लादेश की सहायता राशि में की गई है, जिसे आधा (50%) कर दिया गया है।
मालदीव और म्यांमार: इन दोनों देशों के बजट में ₹50-50 करोड़ की कमी की गई है।

चाबहार बंदरगाह के लिए राशि आवंटन गायब
बीते दिनों में कई हलकों में यह भी चर्चा हुई कि भारत आने वाले समय में अमेरिका के दबाव में चाबहार बंदरगाह योजना से बाहर भी हो सकता है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ समय पहले ही धमकी दी थी कि ईरान में जारी प्रदर्शनों के बीच धमकी दी थी कि उससे व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी के अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया जाएगा।

भारत पर पहले ही अमेरिका की तरफ से कुल 50 फीसद टैरिफ लगाया जा चुका है। इसमें 25 फीसदी आयात शुल्क व्यापार के मसले पर, जबकि अतिरिक्त 25 फीसदी रूस से तेल खरीद को लेकर लागू है। ऐसे में जब ट्रंप प्रशासन की तरफ से ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर टैरिफ का एलान किया गया तो मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस तक ने कहा कि भारत ने ट्रंप के दबाव में ईरान के चाबहार बंदरगाह पर नियंत्रण छोड़ दिया है। पार्टी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार ने चाबहार पर जनता के करीब 1100 करोड़ रुपये लगाए थे, जो कि अब बर्बाद हो चुके हैं।

तब भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि वह चाबहार बंदरगाह को लेकर अमेरिकी अधिकारियों से बात कर रहा है। हालांकि, अब ट्रंप की धमकियों का असर चाबहार परियोजना पर पड़ता दिख रहा है। बजट में इस बंदरगाह परियोजना के लिए जहां 2025-26 के बजट में 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं 2026-27 के आवंटन वाला हिस्सा खाली छोड़ दिया गया है।

आपदा प्रबंधन के लिए भारत ने पिछली बार के मुकाबले बढ़ाई राशि
भारत ने विदेश में आपदा प्रबंधन के लिए सहायता के तौर पर 2025-26 के 64 करोड़ के मुकाबले 2026-27 में 80 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की है। भारत ने बीते साल इस राशि के जरिए श्रीलंका की दित्वाह चक्रवात से निपटने में मदद की। इसके अलावा म्यांमार और अफगानिस्तान की भूकंप के बाद हुई तबाही से निपटने में भी मदद की गई। सरकार ने इस राशि के जरिए कुछ देशों को राहत सामग्री भी पहुंचाई है।

विदेश की बाकी योजनाओं पर कितना बजट?

  • केंद्र सरकार ने विदेश मंत्रालय से जुड़े सचिवालयों के लिए 761.21 करोड़ का बजट तय किया।
  • दूतावासों-मिशन्स के लिए 5059.30 करोड़ रुपये तय किए गए।
  • पासपोर्ट और आव्रजन व्यवस्था के लिए 2435.13 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
  • विदेश में रह रही भारतीय महिलाओं के कल्याण की योजनाओं के लिए पांच करोड़ रुपये दिए गए।
  • मंत्रालय के अन्य खर्चों के लिए 1265 करोड़ रुपये बजट में रखे गए हैं।
  • अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों/ट्रेनिंग के लिए 1292 करोड़ रुपये तय किए गए हैं।
  • सांस्कृतिक और विरासत परियोजनाओं के लिए 20 करोड़ रुपये आवंटित।

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