
इस वर्ष दिवाली 20 अक्तूबर 2025, सोमवार को मनाई जाएगी। पंचांग में इस बार अमावस्या तिथि दो दिनों तक रहने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी, लेकिन ज्योतिष और धर्मशास्त्रों के अनुसार मुख्य महालक्ष्मी पूजन 20 अक्तूबर की रात को ही किया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल, अमावस्या तिथि, निशीथ काल, वृषभ लग्न और सिद्धि योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिसे लक्ष्मी-गणेश पूजन के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

ज्योतिषाचार्य के अनुसार, 20 अक्तूबर 2025 को कार्तिक कृष्ण अमावस्या रहेगी। इस दिन स्वाति नक्षत्र, चंद्रमा तुला राशि में और सिद्धि योग बन रहा है। धर्मशास्त्रों में उल्लेख है कि जब प्रदोष काल, अमावस्या और वृषभ लग्न एक साथ आते हैं, तो यह महालक्ष्मी पूजन के लिए सबसे श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस कारण 20 अक्तूबर की रात्रि को लक्ष्मी, गणेश और कुबेर पूजन करना अत्यंत शुभ फलदायक रहेगा।

- प्रदोष काल: शाम 5:46 बजे से रात 8:18 बजे तक
- लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: शाम 7:08 से रात 8:18 बजे तक
- वृषभ लग्न: रात 7:29 से 9:26 तक
- सिंह लग्न (मध्यरात्रि पूजन): रात 1:57 से 4:12 तक
शास्त्रों में कहा गया है कि अमावास्यायां तु प्रदोषकाले दीपदानं विशेषतः। लक्ष्म्यै च विधिवद् पूजां धनधान्यप्रदं स्मृतम्॥ अर्थात अमावस्या की प्रदोष वेला में विधिपूर्वक लक्ष्मी पूजन और दीपदान करने से धन, धान्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
शास्त्रों में वर्णित चार विशेष रात्रियां- कालरात्रि (शिवरात्रि), महारात्रि (दिवाली), मोह-रात्रि (जन्माष्टमी) और दारुण रात्रि (होली) में रात्रिकालीन पूजन को विशेष महत्व दिया गया है। इस बार अमावस्या तिथि 20 अक्तूबर की रात को विद्यमान रहेगी, इसलिए यही समय महालक्ष्मी पूजन के लिए शास्त्रसम्मत और फलदायक रहेगा। 21 अक्तूबर को लोग घरों में दीपों से सजावट करें, मेहमानों का स्वागत करें और परिवार के साथ उत्सव मनाएं। हालांकि लक्ष्मी पूजन केवल 20 अक्तूबर की रात में ही करना शुभ रहेगा।
अस्वीकरण: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और पंचांग गणनाओं पर आधारित है। sanchalnews.com इनमें से किसी भी मान्यता की पुष्टि नहीं करता।












