खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup को सरकार ने क्लीन चिट दे दी है। प्रदेश में दवा के इस्तेमाल के बाद बच्चों की मौत और तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए। इसके बाद सरकार ने एक कमेटी बनाकर दवा को फिर से क्वालिटी चेक के लिए राजकीय औषधि प्रशिक्षण प्रयोगशाला को भेज दिया था। क्वालिटी चेक में दवा को क्लीन चिट दे दी गई है। यह दवा मुख्यमंत्री निशुल्क दवा योजना में कैसन फार्मा कंपनी, सरना डूंगर की ओर से सप्लाई की गई थी। राजस्थान में इस दवा की सप्लाई इसी साल जून से की गई थी। प्रदेश में अब तक इस दवा की 1 लाख 64 हजार डोज मरीजों को दी जा चुकी हैं।
स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र खींवसर ने क्या कहा
कफ सिरप सेवन से बच्चों के मौत के मामले में स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि जिस दवा के कारण यह घटना बताई जा रही है. वह किसी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर द्वारा लिखी या परामर्शित नहीं की गई थी. यह दवा बच्चों को उनके परिजनों के स्तर पर दी गई है. बच्चों के परिजनों ने इसे कही से भी खरीद कर दे दी. खींवसर ने कहा कि इस मामले में स्वास्थ्य विभाग की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने दवा की गुणवत्ता को लेकर भी कहा कि दवा की जांच हो चुकी है और दवा में किसी तरह की दिक्कत नहीं है
भरतपुर में एक और मौत
भरतपुर जिले के वैर तहसील के लुहासा गांव में खांसी के सिरप से एक और बच्चे की संदिग्ध मौत का मामला सामने आया है। इससे पहले बयाना तहसील में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। जानकारी के अनुसार, गांव लुहासा निवासी निहाल सिंह अपने दो बेटों थान सिंह (5) और तीर्थराज सिंह (2) को 23 सितंबर को सामान्य खांसी-जुकाम की शिकायत पर वैर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर गए थे। वहां डॉक्टर ने दवाइयों के साथ खांसी की सिरप Dextromethorphan HBr Syrup भी लिखी थी। सिरप पीने के कुछ समय बाद ही छोटा बेटा तीर्थराज बेहोश हो गया। बेहोश होने के बाद बच्चे को भरतपुर जिला अस्पताल और फिर वहां से जयपुर रेफर किया गया, जहां 27 सितंबर को जेके लोन अस्पताल में डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
जांच रिपोर्ट में क्या कहा गया
रिपोर्ट के मुताबिक लैब के अधिकारी है रामबाबू के दस्तखत से जांच रिपोर्ट जारी की गई है. सेठी कॉलोनी की औषधि परीक्षण प्रयोगशाला की तरफ से यह रिपोर्ट दी गई है. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 29 सितंबर 2025 को उनके पास सैंपल आए और आरएमएससीएल यानि राजस्थान मेडिकल सर्विसेज लिमिटेड के क्वालिटी कन्ट्रोल एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर की तरफ से यह सैंपल भेजे गए. इनमें केयसंस फार्मा का जो सैंपल था, उसका बैच नम्बर केएल-25/147 और दूसरे बैच के सैम्पल जांच के लिए मिले थे.
बैच नम्बर 147 की मैन्युफैक्चरिंग तारीख जून 2025 है, जबकि इसकी एक्सपायरी डेट में मई 2027 की तारीख लिखी गई है. केयसंस फार्मा की इस दवाई में प्रत्येक 5ML डोज़ में डेक्स्ट्रोमेथोर्फिन हाई ब्रोमाइड की 13.5 Mg की मात्रा होने का दावा था. इसके फ्लेवर और रंग का जिक्र भी इसमें किया गया है. जांच के बाद जो रिपोर्ट आई है उसमें साफ लिखा गया है कि दवा में जो मात्रा 13.5 Mg होने का दावा किया था. वह 13.95 Mg मिली है. यानी दावा की गई मात्रा से 3.36 फीसदी ज्यादा मात्रा मिली है. इस रिपोर्ट में यह भी दर्शाया गया है कि इसकी अनुमत सीमा 95 से 105 फ़ीसदी के बीच हो सकती है. इसी तरह जो बैच नंबर 148 का सैंपल है, उसमें 13.5 Mg के दावे के मुकाबले 13.45 एमजी दवा मिली है. यह कंपनी के दावे के मुकाबले 99.65 फीसदी है. बैच नंबर 250 में दवा की मात्रा 13.22 Mg मिली है. यानि दावे के मुकाबले इसमें 97.92 फ़ीसदी दवाई है. यह तीनों बैच जयपुर की कम्पनी कैसन्स फार्मा के प्रोडक्शन हैं











