इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद राजधानी भोपाल में भी पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता गहराती जा रही है। एक ओर शहर के करोंद सहित कई इलाकों में पानी और सीवेज लाइनें एक ही चैंबर से गुजरने के आरोप सामने आए हैं, वहीं दूसरी ओर इस मुद्दे पर प्रदेश की राजनीति भी गरमा गई है।
करोंद इलाके में सामने आई तस्वीरों में एक ही चैंबर से पानी और सीवेज की लाइनें गुजरती दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस नेताओं ने मौके पर पहुंचकर इसे गंभीर लापरवाही बताया और आशंका जताई कि इससे पीने के पानी में गंदगी मिल सकती है। कांग्रेस का दावा है कि इस इलाके सहित शहर के कई हिस्सों में लोग लंबे समय से बदबूदार और मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने कहा कि नरेला और करोंद क्षेत्र में पहले सीवेज चैंबर बनाए गए और बाद में उन्हीं से पानी की लाइन निकाल दी गई। इस पर पहले भी आपत्ति दर्ज कराई गई, लेकिन नगर निगम ने ध्यान नहीं दिया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो निगम आयुक्त कार्यालय का घेराव किया जाएगा।

नगर निगम कॉल सेंटर और सीएम हेल्पलाइन पर हर महीने औसतन 10 से ज्यादा गंदे पानी की शिकायतें दर्ज हो रही हैं। ईदगाह हिल्स, करोंद, 12 नंबर क्षेत्र, रोशनपुरा और नीलबड़ की कॉलोनियों के रहवासियों ने भी नलों से बदबूदार और मटमैले पानी की शिकायत की है। कई मल्टियों में पानी के वाल्व सीवेज में डूबे रहने की बात भी सामने आई है। इंदौर की घटना के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है। महापौर मालती राय के निर्देश पर इंजीनियरों की टीमें संदिग्ध लाइनों की जांच कर रही हैं। पहले ही दिन ओवरहेड टैंकों और घरों से 300 से अधिक पानी के सैंपल लिए गए, यह प्रक्रिया आगे भी जारी है।

दूसरी ओर, इंदौर मामले पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। भोपाल में महिला कांग्रेस ने मंत्री के सरकारी निवास के बाहर प्रदर्शन किया। हाथों में घंटियां लेकर कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और मंत्री की फोटो पर जूते-चप्पल बरसाए। जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष संतोष कंसाना ने कहा कि ऐसे गंभीर मामले में गैर-जिम्मेदाराना बयान बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। दूषित पानी का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि राजनीतिक और जनस्वास्थ्य से जुड़ा बड़ा सवाल बन गया है। आने वाले दिनों में इस पर कार्रवाई और सियासत दोनों और तेज होने के आसार हैं।







