भारत-पाक सीमा पर जैसलमेर में विजयादशमी पर BSF की तोपखाना रेजिमेंट ने विधि-विधान से शस्त्र पूजन किया. साथ ही दुश्मन को कड़ा संदेश दिया कि सुरक्षा बल देश की सीमा पर हर चुनौती से मुकाबला करने के लिए तैयार है. इस दौरान जवानों ने मां दुर्गा और उनकी योगिनी जया-विजया का स्मरण कर हथियारों पर पुष्प अर्पित किए. यह परंपरा भारतीय संस्कृति में बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है, जो सेना और सुरक्षा बलों के लिए विशेष महत्व रखती है
यह आयोजन सिर्फ शस्त्र पूजन तक सीमित नहीं था. बीएसएफ की यह रेजिमेंट हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के कारण चर्चा में रही, जिसने पाकिस्तान की घुसपैठ और नापाक हरकतों को नाकाम किया. बीएसएफ ने भारतीय सेना के साथ तालमेल बनाकर दुश्मन की कई चौकियों को ध्वस्त किया.
इस ऑपरेशन में जवान रात-दिन बिना आराम के मोर्चे पर डटे रहे, जिससे भारत की संप्रभुता की रक्षा हुई. जैसलमेर का रेगिस्तानी इलाका रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है और बीएसएफ की चौकसी ने दुश्मन को साफ संदेश दिया कि सीमा में सेंध लगाना असंभव है यह सिर्फ सीमा प्रहरी नहीं, बल्कि युद्ध की अग्रिम पंक्ति का योद्धा है. विजयादशमी का यह शस्त्र पूजन और ऑपरेशन सिंदूर की सफलता यह साबित करती है कि बीएसएफ हर स्थिति में सक्षम है. जवानों ने संकल्प लिया कि वे मातृभूमि की रक्षा के लिए हमेशा तत्पर रहेंगे
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