राजपूत करणी सेना ने दी सख्त चेतावनी, UGC के नए नियमों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान

राजपूत करणी सेना ने दी सख्त चेतावनी, UGC के नए नियमों को लेकर विधानसभा घेराव का ऐलान

जयपुर में यूजीसी के नए नियमों को लेकर माहौल गरमा गया है. इस बीच श्री राजपूत करणी सेना ने बड़ा ऐलान कर दिया है. श्री राजपूत करणी सेना ने सबसे पहले राजस्थान विधानसभा घेरने का ऐलान किया है. इसके बाद संसद का घेराव और भारत बंद का आह्वान किया जाएगा.

बुधवार (28 जनवरी) से राजस्थान विधानसभा के शीतकालीन सत्र की शुरुआत होने वाली है. इसके बाद विधानसभा के घेराव की तारीख का ऐलान किया जाएगा. श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का कहना है कि यह नियम किसी भी सूरत में मंजूर नहीं है.

श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष ने क्या कहा?

श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष ने आगे कहा कि इन नियमों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. उन्होंने आगे कहा कि जरूरत पड़ी तो जलियांवाला बाग की तरह हिंसक आंदोलन भी किया जाएगा. उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से सवर्ण विरोधी है.

उनका कहना है कि इसकी आड़ में सवर्णों का उत्पीड़न किया जाएगा. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सवर्ण समुदाय के सभी लोग एकजुट होकर इसका विरोध करेंगे. साथ ही सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया जाएगा.

मंडल आंदोलन की तरह व्यापक होगा विरोध

महिपाल सिंह मकराना ने ने का कि मंडल आंदोलन की तरह इसका व्यापक विरोध किया जाएगा. अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना के मुताबिक ‘बटोगे तो कटोगे’ का नारा देने वाले लोग खुद ही हिंदुओं और समाज को बांटने का काम कर रहे हैं.

अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को इसे हर हाल में वापस लेना ही होगा. साथ ही हम सरकार को इसे वापस लेने के लिए मजबूर कर देंगे. उन्होंने आगे चेतावनी देते हुए कहा कि इस तरह का आंदोलन किया जाएगा, जिसके बारे में सरकार ने सोचा भी नहीं होगा.

क्यों शुरू हुआ विवाद?

उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए 13 जनवरी, 2026 को प्रकाशित यूजीसी के नियमों में विशेष समितियों, हेल्पलाइन और निगरानी दलों की स्थापना अनिवार्य की गई है ताकि विशेष रूप से अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों की शिकायतों का समाधान किया जा सके.

इसी को लेकर छात्रों और संगठनों में आक्रोश पैदा हो गया. अब देशभर में इन नए नियमों को लेकर जमकर विरोध जताया जा रहा है. साथ ही लोगों की मांग है कि इन नियमों को वापस लिया जाए

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