राजस्थान में शहरी शासन व्यवस्था में बड़ा बदलाव लागू हो चुका है। जयपुर, जोधपुर और कोटा में दो-दो नगर निगमों को मर्ज करने के बाद अब राज्य सरकार ने इन निगमों में प्रशासक नियुक्त कर दिए हैं। इन निगमों के बोर्ड का कार्यकाल 9 नवंबर को समाप्त हो रहा है और इसके बाद यहां कार्यवाहक के रूप में संबंधित संभागीय आयुक्त प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालेंगे। यह पहली बार है जब शहरी निकाय की कमान सीधे सीनियर आईएएस अधिकारी यानी संभागीय आयुक्तों को सौंपी गई है। इससे पहले आमतौर पर जिला कलेक्टर या नगर निगम कमिश्नर इस भूमिका में रहते थे।
सरकार ‘वन स्टेट, वन इलेक्शन’ के लक्ष्य के तहत सभी नगरीय निकायों में एक साथ चुनाव करवाने पर काम कर रही है। फिलहाल प्रदेश के कई शहरी निकायों में प्रशासक पहले से ही तैनात हैं और आने वाले महीनों में इनकी संख्या और बढ़ने वाली है। स्वायत्त शासन विभाग के सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में 50 नगरीय निकायों का कार्यकाल समाप्त होगा। वहीं जनवरी 2026 में 90 और फरवरी 2026 में एक निकाय का कार्यकाल पूरा होगा। इस प्रकार आने वाले कुछ महीनों में पूरे प्रदेश में चुनावी कवायद की तैयारियां तेज होंगी।

राज्य में 2019 में वार्डों के पुनर्गठन के बाद जयपुर, जोधपुर और कोटा में कुल छह नगर निगम बनाए गए थे, जिससे उस समय निकायों की संख्या बढ़कर 196 हो गई थी। 2019 से 2021 तक इनके चुनाव भी संपन्न हुए थे। बाद में जनसंख्या और शहरी विस्तार के आधार पर कई ग्राम पंचायतों को नगरीय निकायों में क्रमोन्नत किया गया, जिससे 116 नए निकाय अस्तित्व में आए। इसी दौरान हाल ही में तीन निकायों को समाप्त करने की अधिसूचना जारी की गई, जिनमें जयपुर, जोधपुर और कोटा का एक-एक निकाय शामिल है।
इस तरह वर्तमान में कुल 309 नगरीय निकाय हैं और संभावना है कि इस साल के अंत या अगले साल की शुरुआत में सभी निकायों में एक साथ चुनाव करवाए जाएंगे। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में एकरूपता के साथ चुनावी लागत और समय की भी बचत होगी। सरकार का मानना है कि यह कदम शहरी विकास और सुशासन को नई दिशा देगा।











