किडनी हमारे शरीर का फिल्टर होती है, जो खून से गंदगी और अतिरिक्त पानी बाहर निकालने का काम करती है. जब किडनी ठीक से काम नहीं करती, तो इसका असर सबसे पहले हाथों और पैरों पर दिखाई देने लगता है. कई बार लोग इन शुरुआती संकेतों को मामूली समझकर टाल देते हैं
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किडनी सिर्फ टॉक्सिन निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर में पानी, नमक और मिनरल्स जैसे पोटैशियम व कैल्शियम का संतुलन भी बनाए रखती है. यही नहीं, ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने और खून बनने में मदद करने वाले हार्मोन भी किडनी ही बनाती है. इसलिए इसमें आई गड़बड़ी पूरे शरीर को प्रभावित करती है
हाथों, पैरों और टखनों में सूजन किडनी खराब होने का सबसे आम संकेत माना जाता है. अगर सूजन वाली जगह को उंगली से दबाने पर वहां गड्ढा बन जाए, तो समझ लें कि शरीर में पानी जमा हो रहा है. यह किडनी के कमजोर होने का साफ इशारा हो सकता है

किडनी डैमेज होने पर मांसपेशियों में खिंचाव और अचानक तेज ऐंठन भी हो सकती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि किडनी इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बिगाड़ देती है. पैरों की मांसपेशियों में दर्द और जकड़न इस समस्या का शुरुआती संकेत हो सकता है अगर हाथों या पैरों की त्वचा में ज्यादा खुजली, रूखापन या रैशेज दिखने लगें, तो इसे नजरअंदाज न करें. जब किडनी खून से टॉक्सिन नहीं निकाल पाती, तो ये गंदगी त्वचा के नीचे जमा होने लगती है, जिससे खुजली और जलन होती है
हाथों और पैरों में सुन्नपन या झनझनाहट भी किडनी खराब होने का संकेत हो सकता है. किडनी डैमेज से नसों पर असर पड़ता है, जिसे मेडिकल भाषा में पेरिफेरल न्यूरोपैथी कहा जाता है. इससे हाथ-पैरों में अजीब-सा एहसास होने लगता है
पैरों में लगातार दर्द, कमजोरी या थकान महसूस होना भी किडनी की समस्या से जुड़ा हो सकता है. शरीर में टॉक्सिन जमा होने से हड्डियों और मांसपेशियों पर असर पड़ता है.अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और किडनी की जांच कराएं, क्योंकि समय रहते पहचान होने पर किडनी की बीमारी को काबू में किया जा सकता है







