रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को उदयपुर के भूपाल नोबल्स विश्वविद्यालय के 104वें स्थापना दिवस समारोह में पहुचे थे स्थापना दिवस समारोह में कहा कि आत्मसम्मान की भावना महत्वपूर्ण है, लेकिन इसे कभी भी घमंड में नहीं बदलना चाहिए। आत्मसम्मान और अहंकार के बीच के नाज़ुक संतुलन को समझने की आवश्यकता पर जोर दिया और लोगों से इन दोनों के बीच की महीन रेखा को कभी पार न करने की अपील की।
राजनाथ सिंह ने कहा कि कई बार अहंकारी व्यक्ति भी यह दावा करता है कि उसमें आत्मसम्मान की भावना बहुत अधिक है, जिससे इन दोनों भावनाओं के बीच की पतली रेखा स्पष्ट होती है। उन्होंने कहा कि मैं सभी बच्चों से कहना चाहता हूं कि अहंकार को कभी भी अपने जीवन में नहीं आने देना चाहिए।
आत्मसम्मान को विकसित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए रक्षा मंत्री ने दोहराया कि इसे कभी भी घमंड का रूप नहीं लेने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि आत्मसम्मान की भावना मजबूत होनी चाहिए, लेकिन अहंकार को कभी जड़ नहीं जमाने देनी चाहिए।
राजनाथ सिंह ने कहा कि प्राचीन काल से भारतीय ज्ञान प्रणाली अद्वितीय रही है, जिसमें आस्था और विज्ञान, लौकिक और आध्यात्मिक, कर्म और धर्म तथा भोग और त्याग के बीच संतुलन दिखाई देता है। यही संतुलन भारतीय चिंतन को बौद्धिक होने के साथ जीवन उपयोगी भी बनाता है।







