हनुमानगढ़ के राठीखेड़ा गांव में अनाज आधारित एथेनॉल फैक्टरी को लेकर जारी हिंसा और विरोध के बीच पहले दौर की वार्ता का कोई हल नहीं निकल पाया है। जिला प्रशासन से बातचीत में किसानों ने मांगें रखीं। जवाब में प्रशासन की ओर से समय की मांग की गई। इसके चलते पहले दौर की वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। माना जा रहा है कि अगले दौर की बातचीत में इस पर कोई हल निकलेगा।
चर्चा के दौरान किसानों की ओर से जो मांगें रखी गईं उनके बारे में समिति में शामिल कांग्रेस नेत्री शबनम गोदारा ने बताया। किसानों की ओर से जो मांगें रखी गईं उनमें फैक्टरी न लगवाने, किसानों के खिलाफ दर्ज हुए मामले वापस लेने, आम लोगों की गिरफ्तारी रोकने और बुधवार को हुई हिंसा की निष्पक्ष जांच की बात कही गई। इस पर मीटिंग में मौजूद जिला कलेक्टर डॉ. खुशाल सिंह ने किसान संघर्ष समिति का मांग पत्र लेकर कुछ समय में जवाब देने की बात कही है।

उपद्रव के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए टिब्बी और आसपास के गांवों में शांति भंग होने की आशंका के चलते इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी हैं, साथ ही स्कूल और दुकानें बंद रखने का आदेश भी दिया गया
यह विवाद ड्यून एथेनॉल प्राइवेट लिमिटेड (चंडीगढ़ में पंजीकृत, 2020 में स्थापित) द्वारा लगाए जा रहे 40-मेगावाट के अनाज-आधारित एथेनॉल प्लांट को लेकर है. यह परियोजना भारत के एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल (EBP) कार्यक्रम का हिस्सा है. ‘एथेनॉल फैक्ट्री हटाओ संघर्ष समिति’ से जुड़े किसानों की मुख्य चिंता ‘भूमि अधिग्रहण’ और ‘क्षेत्र के भूजल स्तर पर फैक्ट्री के संचालन का नकारात्मक असर’ होने को लेकर है. किसानों को डर है कि इस फैक्ट्री की वजह से पर्यावरण और स्थानीय आजीविका पर संभावित खतरा मंडराने लगेगा.
किसानों ने निर्माण रोकने का लिखित आदेश जारी न होने तक विरोध जारी रखने की घोषणा की है. वहीं, प्रशासन का कहना है कि वे संवाद के लिए तैयार हैं, लेकिन हिंसा और कानून हाथ में लेने को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अगले कदम पर प्रशासन की ओर से जल्द ही आधिकारिक वक्तव्य जारी किया जा सकता है










