छात्रा अमायरा की दर्दनाक मृत्यु और प्रदेशभर में लगातार सामने आ रही शिक्षा विभाग की गंभीर अव्यवस्थाओं के बीच संयुक्त अभिभावक संघ ने राज्य सरकार, विशेषकर शिक्षा मंत्री की कार्यशैली पर कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संघ ने कहा कि जिस तरह राज्यभर में अभिभावक और सामाजिक संगठन न्याय की मांग को लेकर आवाज उठा रहे हैं, उसके बावजूद शिक्षा मंत्री का मौन रहना अत्यंत दुखद और असंवेदनशील है। अभिभावकों में भय और चिंता का माहौल है, लेकिन विभागीय नेतृत्व की निष्क्रियता इस स्थिति को और गंभीर बनाती जा रही है।
जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल में चौथी क्लास की बच्ची अमायरा के सुसाइड केस मे 38 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी नाराजगी के चलते मंगलवार को शहर में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के ‘लापता’ होने के पोस्टर लगाए गए। ये पोस्टर शहर के कई चौराहों, बस स्टॉप और मुख्य सड़कों पर लगाए गए हैं।

पोस्टर में लिखा है कि राजस्थान के सभी माता-पिता मंत्री की तलाश कर रहे हैं। एक प्राइवेट स्कूल में छोटी सी बच्ची ने अपनी जान दे दी। और मदन दिलावर कुछ करने के बजाय भाग खड़े हुए। सुनने में आया है कि स्कूल ने इनके विभाग को अंदर ही नहीं घुसने दिया। पोस्टर लगाने वाली परिवर्तन संस्था की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया- नीरजा मोदी स्कूल में अमायरा ने बुलिंग से परेशान होकर अपनी जान दे दी। सीबीएसई रिपोर्ट में भी स्कूल की लापरवाही स्पष्ट है, लेकिन शिक्षा मंत्री इस पूरे मामले में अनुपस्थित हैं।
पोस्टर के साथ दिखे परिवर्तन संस्था के अध्यक्ष आशुतोष रांका ने कहा- राजस्थान के शिक्षा मंत्री पिछले दो साल से कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर अनुपस्थित रहे हैं। उन्होंने झालावाड़ में स्कूल गिरने से बच्चों की मौत, दूध पाउडर घोटाला, किताबों की समय पर अनुपलब्धता और एसआईआर नियमों के कारण शिक्षकों की आत्महत्या जैसी घटनाएं हुईं। अमायरा मामले में भी यही स्थिति बनी हुई है।







