भारत और रूस के रिश्तों को नई मजबूती देने वाली यह यात्रा, अंतरराष्ट्रीय हालात और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है पुतिन की यह यात्रा कूटनीतिक रूप से काफी अहम मानी जा रही है. दोनों देशों के बीच व्यापार, अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति और मीडिया सहित कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने वाले समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है
भारत और रूस हिंद महासागर से आर्कटिक तक नए ट्रेड रूट पर काम कर रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की मीटिंग के में इसको लेकर चर्चा हुई है

पीएम मोदी ने कहा, ”बिजनेस के लिए सिप्लाईड और प्रेडिक्टेबल मैकेनिज्म बनाए जा रहे हैं. भारत और यूरेशियन इकॉनोमिक यूनियन के बीच FTA पर चर्चा शुरू हो गई है. बिजनेस हो या डिप्लोमेसी, किसी भी साझेदारी की नींव आपसी विश्वास है. भारत और रूस संबंधों की सबसे बड़ी शक्ति यही विश्वास है. यही हमारे साझे प्रयासों को दिशा भी देता है और गति भी देता है. यही वो लॉन्चपैड है, जो हमें नए सपनों और नई आकांक्षाओं की उड़ान भरने के लिए प्रेरित करता है
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”भारत आज दुनिया का स्किल पावर के तौर पर उभर रहा है. पिछले 11 साल में भारत से स्पीड के साथ विकास किया है. 11 साल के यात्रा मे हम थके और रोके नहीं है. जीएसटी में रिफार्म हुआ है. डिफेंस और स्पेस को प्राईवेट सेक्टर के लिए खोल दिया गया है. हमें विकसित भारत बनना है. कल और आज उपयोगी और सार्थक चर्चा हुई है

भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर – पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ”बीते 11 वर्षों में भारत में जिस स्पीड और स्केल के साथ बदलाव हुए हैं, वह अभूतपूर्व हैं. रीफोर्म, परफॉर्म और ट्रांसफोर्म, इस सिद्धांत पर चलते हुए भारत तेज़ी से विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है. 11 वर्षों की इस रिफॉर्म यात्रा में हम न थके हैं और न ही रुके हैं. हमारे संकल्प पहले से भी अधिक मजबूत हैं, और हम अपने लक्ष्य की दिशा में बड़े आत्मविश्वास के साथ तेज गति से आगे बढ़ रहे हैं
भारत-रूस साथ मिलकर EV मैन्युफैक्चरिंग पर करेंगे काम
भारत-रूस बिजनेस फोरम में PM नरेंद्र मोदी ने कहा, “भारत आज सस्ते, कुशल EVs, टू-व्हीलर्स और CNG मोबिलिटी सॉल्यूशंस में आज ग्लोबल लीडर है. रूस एडवांस्ड मटीरियल्स का एक बड़ा प्रोड्यूसर है. हम साथ मिलकर EV मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमोटिव कंपोनेंट्स और मोबिलिटी टेक में साझेदारी कर सकते हैं. इससे हम न केवल अपनी जरूरतों को पूरी कर सकेंगे बल्कि ग्लोबल साउथ, विशेषकर अफ्रीका के विकास में भी योगदान दे सकते हैं











