पाकिस्तान में लगातार ताकतवर बनकर उभर रहे सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस (सीडीएफ) के तौर पर पदभार संभाला। पाकिस्तानी संविधान में संशोधन के बाद मिली नई जिम्मेदारी के तहत अब जल, थल और वायु सेना तीनों की कमान उनके हाथ में होगी। उन्हें परमाणु हथियारों पर नियंत्रण का अधिकार भी मिल गया है।
संशोधन के तहत तीनों सेनाओं के प्रमुख के तौर पर 5 वर्ष का कार्यकाल निर्धारित किया गया, जिससे मुनीर 2030 तक इस पर काबिज रह सकेंगे। वैसे तो पाकिस्तानी सेना निर्वाचित सरकार का तख्ता पलटने या फिर अपने पसंदीदा लोगों को सत्ता शीर्ष पर बैठाने के लिए कुख्यात रही है। लेकिन सेना प्रमुख आसिम मुनीर ऐसा कुछ किए बिना ही सुप्रीम ताकत बन गए हैं। माना जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना अपने सबसे ताकतवर दौर में पहुंच चुकी हैं। मुनीर को अब नई व्यवस्था में देश के राष्ट्रपति के बराबर कानूनी अधिकार मिल गए हैं।
पाकिस्तान पर खुले तौर पर राज करने वाले आखिरी सैन्य शासक परवेज मुशर्रफ थे, जिन्होंने 1999 में तख्तापलट से सत्ता हथियाई थी और 2008 तक राष्ट्रपति रहे। आसिम मुनीर मुशर्रफ के बाद सबसे ताकतवर जनरल बन चुके हैं। देश में 27वें संशोधन ने संतुलन सेना के पक्ष में बढ़ा दिया है। अब सेना प्रमुख का दर्जा सभी सेना प्रमुखों से ऊपर हो गया है।
बदलावों के साथ सेना पर सरकार का नियंत्रण भी घटा है। सीडीएस के पास अब वाइस चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ (वीसीओएएस) के पद पर नियुक्ति की सिफारिश करने का अधिकार होगा, जिसे फेडरल सरकार की तरफ से मंजूरी दी जाएगी। पहले, ये नियुक्तियां करने का सीधा अधिकार सरकार के पास था। इनके अलावा, नेशनल स्ट्रेटेजिक कमांड प्रमुख के चयन में भी सेना अहम भूमिका निभाएगी, जो पाकिस्तान के एटमी हथियारों पर नियंत्रण रखती है।








