राजस्थान में नेशनल और स्टेट हाईवे के किनारे चल रहे शराब के ठेकों को लेकर हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने हाईवे के 500 मीटर के दायरे में चल रहे सभी 1102 शराब के ठेकों को 2 महीने के अंदर हटाने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी-
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चाहे ये ठेके नगरपालिका या शहरी सीमा में ही क्यों न आते हों, अगर ये हाईवे पर है, तो इन्हें हटाना ही होगा। यह फैसला प्रदेश में बढ़ते सड़क हादसों और ‘ड्रंक एंड ड्राइव‘ के मामलों को देखते हुए दिया गया है। कोर्ट ने कहा- संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत लोगों की जान की सुरक्षा सर्वोपरि है। कोर्ट ने माना कि सरकार ने अपने विवेक का दुरुपयोग कर हाईवे को लिकर-फ्रेंडली कॉरिडोर बना दिया है। केवल शहरी सीमा में होने से हाईवे पर शराब बेचने की छूट नहीं मिल जाती। कोर्ट ने साफ कहा कि 1102 दुकानों का हाईवे पर संचालन जन सुरक्षा के लिए खतरा है और इन्हें हटाना या शिफ्ट करना ही होगा। 2200 करोड़ रुपए के राजस्व के लिए हम लोगों को मरने के लिए नहीं छोड़ सकते।
कोर्ट ने बताया कि 2025 में अब तक ड्रंक एंड ड्राइव के मामलों में करीब 8% की बढ़ोतरी हुई है। कोर्ट ने हाल ही में जयपुर के हरमाड़ा (15 मौतें) और फलोदी (15 मौतें) में हुए। भीषण सड़क हादसों का हवाला देते हुए कहा कि शराब पीकर गाड़ी चलाना जानलेवा साबित हो रहा है।
राज्य सरकार की दलील-
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपना पक्ष रखते हुए स्वीकार किया कि प्रदेश में कुल 7665 शराब की दुकानों में से 1102 दुकानें नेशनल और स्टेट हाईवे पर है। सरकार की दलील थी कि ये दुकानें आबादी/नगरपालिका क्षेत्र में आती है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की छूट के दायरे में है। सरकार ने यह भी बताया कि इन 1102 दुकानों से राज्य को सालाना करीब 2221.78 करोड़ रुपए का भारी-भरकम राजस्व मिलता है। हाईकोर्ट ने सरकार की इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।










