पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में बुधवार का दिन युद्ध जैसी स्थितियों से भरा रहा। जैसलमेर, जालौर और बाड़मेर जिलों में थल सेना और वायुसेना के जांबाजों ने अपने संयुक्त सैन्य अभ्यासों के दौरान जबरदस्त युद्ध कौशल और समन्वय का प्रदर्शन किया। देश की पश्चिमी बॉर्डर पर तीनों सेनाओं का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ बुधवार को अखंड प्रहार के तहत ‘हेलिबोर्न ऑपरेशन’ के साथ पूरा हुआ।

इस दौरान वायु और थल सेना ने जैसलमेर में अभ्यास किया, वहीं गुजरात के कच्छ में नौसेना ने युद्धाभ्यास किया। 13 दिन तक चले युद्धाभ्यास में करीब 30 हजार सैनिक शामिल हुए।युद्धाभ्यास में DRDO और निजी भारतीय कंपनियों की बनाई मशीनरी और ड्रोन का उपयोग किया गया, जिनसे आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई दी।
जैसलमेर जिले के सियालो का तला क्षेत्र में सेना के जवानों ने युद्ध जैसे दृश्य का निर्माण किया। इस दौरान अभ्यास में दिखाया गया कि दुश्मन सैनिकों ने भारत की अग्रिम चौकियों पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद भारतीय थल और वायु सेना ने जवाबी हमला कर उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। यह प्रदर्शन ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के समापन के तहत किया गया।

सेना की सेवन पैरा टीम के जवानों ने यह साबित किया कि भारतीय सेना के लिए जल, थल और नभ तीनों ही मार्गों में कोई भी बाधा दुर्गम नहीं है। वायुसेना के सी-295 परिवहन विमान से पैराकमांडो ने ऊंचाई से पैराशूट के सहारे छलांग लगाकर वॉर जोन में उतरने का अद्भुत प्रदर्शन किया।
कमांड पोस्ट से हर यूनिट पर नजर रखी गई। ड्रोन और सैटेलाइट से रियल-टाइम तस्वीरें स्क्रीन पर रही। सेना के अधिकारियों ने कहा- सभी कुछ एकदम सटीक किया गया, एक गलती की भी गुंजाइश नहीं रखी गई। नेटवर्क, सेंसर और सटीक समन्वय से हमला किया गया।

ऑपरेशन के तहत धोरों में टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों में ‘सुदर्शन चक्र’ और ‘कोणार्क कोर’ की यूनिट्स तेजी से आगे बढ़ी। ऊपर से हेलिकॉप्टर्स ने उन्हें कवरेज दी। कौन-सा टैंक कहां जाएगा, हेलिकॉप्टर किस ऊंचाई पर रहेगा और कब जवानों को उतरना है। सब कुछ घड़ी की सुई की तरह तय समय पर सटीकता के साथ किया गया।

सेना के अधिकारियों के अनुसार- जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ तालमेल बिठाते हुए दुश्मन को किसी भी दिशा से जवाब देने की तैयारी को परखा गया। सीमा पार से संभावित घुसपैठ, ड्रोन ,मिसाइल हमले, साइबर रुकावट को टारगेट पर रखकर जवाबी कार्रवाई की गई।

सेना के अनुसार- ‘अखंड प्रहार’ ने भारतीय सेना को अमेरिका, रूस और चीन जैसी वैश्विक सेनाओं की श्रेणी में ला खड़ा किया है, जो पहले से ही मल्टी-डोमेन ऑपरेशन पर काम कर रही है। इसमें जमीन, वायु, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर पांचों क्षेत्रों में एक साथ लड़ाई की रणनीति अपनाई जाती है।
पाक बॉर्डर पर जैसलमेर के रेगिस्तानी इलाके में 12 दिन चलने वाले ऑपरेशन त्रिशूल के 11वें दिन मरू ज्वाला का युद्धाभ्यास हुआ। आर्मी और एयरफोर्स के जवानों ने आतंकवादियों के ठिकानों और दुश्मन की अग्रिम चौकियों पर साथ मिलकर अटैक किए।











