नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने स्कूली छात्रों की यूनिफॉर्म के लिए दी जाने वाली सहायता राशि में कटौती करने पर सवाल उठाते हुए सरकार पर तंज कसा है। जूली ने कहा- भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव से पूर्व अपने संकल्प पत्र में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों को डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर के माध्यम से स्कूल बैग, किताबें और यूनिफॉर्म खरीदने के लिए 1200 रुपए की वार्षिक सहायता देने की घोषणा की थी। चुनाव के बाद भाजपा सरकार ने स्कूली छात्रों की यूनिफॉर्म पर कैंची चलाते हुए इस राशि में कटौती कर इसे 600 रूपए कर दिया है। इसमें कपड़ा और सिलाई की राशि भी शामिल है।

कहा- कांग्रेस राज में स्कूली बच्चों को 2 जोड़ी स्कूल ड्रेस का कपड़ा और 200 रूपए सिलाई के लिये दिए जा रहे थे, तब भारतीय जनता पार्टी दने कांग्रेस सरकार की इस योजना की आलोचना करते हुए यह कहा कि 200 में स्कूल ड्रेस की सिलाई कैसे होगी। कांग्रेस राज में सभी बच्चों के लिये स्कूल ड्रेस की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन भाजपा सरकार ने ई.डब्ल्यू.एस. और ओबीसी के गरीब बच्चों को छोड़ दिया है। क्या सामान्य श्रेणी के ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत और अन्य जातियों और ओबीसी वर्ग में गरीब बच्चे नहीं हैं? क्या उनके प्रति सरकार की कोई जवाबदेही या जिम्मेदारी नहीं है? सरकार उनका हक कैसे छीन सकती है।
जूली ने कहा- संविधान के अनुरूप ही ई.डब्ल्यू.एस. का आरक्षण दिया गया है, लेकिन इस सरकार की सोच ही यही है कि गरीब को मारो और अमीर को और बड़ा करो। सबका साथ, सबका विकास की लम्बी-चौडी बातें करने वाली भारतीय जनता पार्टी की डबल इंजन सरकार की असली सच्चाई यही है। एक ओर तो सरकार यह कहती है कि पैसे की कोई कमी नहीं है और दूसरी ओर इन छोटी-छोटी योजनाओं पर कैंची चलाकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रही है। सरकार स्कूली ड्रेस का पैसा पहले जितना करे, ओबीसी और EWS के बच्चों को पहले की तरह लाभ दिया जाए।











