पाली जिले के धर्मधारी गांव में रविवार शाम को नम आंखों से 32 साल की खुशबू राजपुरोहित का अंतिम संस्कार किया गया। इससे पहले गांव की गलियों से खुशबू की अंतिम यात्रा निकली तो सभी की आंखें नम हो गई। खुशबू के परिवार के दुख में सहभागी बनते हुए गांव के अधिकांश घरों में चूल्हा नहीं जला। गांव के श्मशान घाट में खुशबू का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान खुशबू के पिता अमरसिंह को ग्रामीणों ने संभाला। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण और समाज के लोग शामिल हुए।

पति और ससुर की गिरफ्तारी बाद उठाया शव
24 अक्टूबर को जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल में इलाज के दौरान खुशबू राजपुरोहित की मौत हो गई थी। पीहर पक्ष ने मृतका के पति हर्षित सिंह सहित ससुराल पक्ष पर खुशबू की हत्या करने का आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करवाया था। और आरोपियों की गिरफ्तारी की बाद ही शव पोस्टमॉर्टम करवाने की बात कहते हुए धरने पर बैठे गए थे।
पुलिस ने 25 अक्टूबर की शाम को खुशबू के पति और ससुर को गिरफ्तार करने की जानकारी दी। इसके बाद खुशबू के परिजन पोस्टमॉर्टम के लिए राजी हुए। 26 अक्टूबर को पोस्टमॉर्टम बाद शव मिलने पर परिजन उसे पाली जिले के धर्मधारी गांव लाए, जहां विधि-विधान से खुशबू का अंतिम संस्कार किया गया।

बच्चा नहीं होने और दहेज कम लाने का देते थे ताने पाली शहर जिले के धर्मधारी हाल पाली के जवाहर नगर रहने वाले व्यापारी अमरसिंह राजपुरोहित की बेटी खुशबू की शादी मई 2022 में पिलोवनी हाल जोधपुर निवासी हर्षित सिंह पुत्र चंदनसिंह के साथ सामाजिक रीति-रिवाज के साथ हुई थी। हर्षित सिंह का जयपुर में सोलर का बिजनेस है।
मृतका के भाई इन्द्रजीत का आरोप है कि शादी के कुछ समय तो सबकुछ ठीक चल रहा था। फिर धीरे-धीरे रिश्ते बिगड़ने लगे। खुशबू के कहने के बाद भी हर्षित उसे अपने साथ जयपुर नहीं ले जा रहा था और कभी महीने में तो कभी दो महीने में एक बार जोधपुर आता था। खुशबू को बच्चा नहीं होने और दहेज कम लाने को लेकर उसके ससुराल पक्ष के लोग ताने देते थे।











