
Bhai Dooj 2025 Shubh Muhurt: रक्षाबंधन के बाद भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्नेह को दर्शाता पर्व ‘भाई दूज’ आज यानी 23 अक्टूबर को राजस्थान सहित पूरे देश में मनाया जा रहा है. हिंदू धर्म में इस त्योहार का विशेष महत्व है. इस दिन बहनें सुबह जल्दी उठकर भाई दूज की आरती उतारती करती हैं और फिर शुभ मुहूर्त (Bhai Dooj Shubh mahurat) में उसके माथे पर तिलक लगाती हैं. यही कारण है कि आज बहनें तिलक लगाने का पावन समय जानने को उत्सुक हैं, ताकि वे उसी शुभ घड़ी में भाई को तिलक लगाकर उनके लिए भगवान से लंबी उम्र और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त कर सकें

पंचांग के अनुसार, कार्तिक शुक्ल द्वितीया तिथि 22 अक्टूबर की रात 8 बजकर 17 मिनट पर शुरू होकर 23 अक्टूबर की रात 10 बजकर 47 मिनट तक रहेगी। पर्व हमेशा उदया तिथि में मनाए जाते हैं, इसलिए शास्त्रों के अनुसार भाई दूज का पर्व 23 अक्टूबर को ही मनाना अत्यंत शुभ और विधि-सम्मत माना गया है। चूंकि पर्वों को उदया तिथि ( जिस दिन सूर्योदय के समय वह तिथि हो, उस दिन मनाया जाता है) इसलिए भाई दूज (Bai Dooj 2025) 23 अक्टूबर, गुरुवार को मनाना ही शास्त्रों के अनुसार उचित माना गया है

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार भाई दूज पर तिलक करने का सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:05 से 2:54 बजे तक रहेगा। इस दौरान 12:05 से 1:30 बजे तक ‘शुभ चौघड़िया’ और 1:30 से 2:54 बजे तक ‘अमृत चौघड़िया’ रहेगी। अमृत चौघड़िया को सर्वाधिक फलदायी और सौभाग्यवर्धक माना जाता है। इस मुहूर्त में भाई को तिलक करने से उसके जीवन में दीर्घायु, समृद्धि और सुख की वृद्धि होती है। भाई दूज पर पूजा और तिलक का कार्य सुबह नहीं, बल्कि दोपहर के समय करना शुभ माना गया है। इस दिन बहनें अपने भाई के माथे पर तिलक कर आरती उतारती हैं, मिठाई खिलाकर उनके दीर्घ जीवन और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं।

भाई को हमेशा अंगूठे से तिलक लगाना चाहिए. प्राचीन काल में युद्ध पर जाने से पहले राजाओं का तिलक अंगूठे से ही किया जाता था. क्योंकि अंगूठा वायु और अग्नि तत्व का प्रतिनिधि करता है. इसलिए अंगूठे से भाई का तिलक करने पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ता है और भाई का भाग्योदय होता है भाई दूज का त्योहार भाई दूज, भैया दूज, भाई टीका, यम द्वितीया, भ्रातृ द्वितीया कई नामों से जाना जाता है। इसे यम द्वितीया, भाऊ बीज, भतरु द्वितीया आदि नामों से जाना जाता है।







