पुलिस हिरासत में आदिवासी युवक की मौत, कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर बैठे MP रोत

पुलिस हिरासत में आदिवासी युवक की मौत, कलेक्ट्रेट के सामने सड़क पर बैठे MP रोत

डूंगरपुर जिले में पुलिस हिरासत में एक युवक की मौत का मामला लगातार गरमाता जा रहा है. दोवड़ा थाने में चोरी के आरोप में हिरासत में लिए गए दिलीप अहारी की तबीयत बिगड़ने के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इस घटना से गुस्साए मृतक के परिजन और आदिवासी समाज के लोग पिछले 3 दिनों से कलेक्ट्रेट के बाहर पड़ाव डाले हुए हैं. उनकी मांगें नहीं माने जाने तक उन्होंने युवक के शव का पोस्टमार्टम करवाने से इनकार कर दिया है

बुधवार तड़के साढ़े 3 बजे तक प्रशासन और आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत का लंबा दौर चला, लेकिन 1 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता की मुख्य मांग पर सहमति नहीं बन पाई. इस कारण रात 2 बजे के करीब प्रभारी मंत्री और सांसद भी वहां से चले गए, जबकि कलेक्टर और एसपी सहित अन्य अधिकारी देर रात तक समझौते के प्रयास में जुटे रहे

पुलिस हिरासत में मौत का मामला

पुलिस ने चोरी के एक मामले में 25 सितंबर को दिलीप अहारी को हिरासत में लिया था. परिजनों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है. पूछताछ के दौरान दिलीप की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और बाद में 26 सितंबर को उदयपुर रेफर किया गया था. 30 सितंबर को इलाज के दौरान दिलीप की मौत हो गई. इस घटना की जानकारी मिलते ही परिजन और आदिवासी समाज के लोग आक्रोशित हो उठे और न्याय की मांग करते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर धरना शुरू कर दिया. यह पड़ाव बुधवार को भी तीसरे दिन जारी रहा

युवक की मौत के बाद प्रशासन ने परिजन और आदिवासी समाज के जनप्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया था. देर रात तक चली इस बातचीत में प्रभारी मंत्री बाबूलाल खराड़ी, सांसद मन्नालाल रावत, बीएपी सांसद राजकुमार रोत, विधायक उमेश मीणा, विधायक अनिल कटारा, साथ ही कलेक्टर अंकित कुमार और एसपी मनीष कुमार भी मौजूद रहे. प्रतिनिधि मंडल ने प्रशासन के सामने निम्नलिखित चार प्रमुख मांगें रखीं:-

1. आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए.
2. आरोपी पुलिसकर्मियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए.
3. मृतक के परिजनों को 1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
4. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए.

प्रशासन की ओर से आरोपी पुलिसकर्मियों को निलंबित (सस्पेंड) करने और परिवार के एक सदस्य को संविदा पर नौकरी देने की मांगों पर सहमति व्यक्त की गई. हालांकि, 1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग पर गतिरोध बना रहा. प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियमानुसार पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत अधिकतम 5 लाख रुपये की ही आर्थिक सहायता दी जा सकती है. इस कम मुआवजे पर प्रतिनिधि मंडल ने असहमति जताई और बैठक छोड़कर बाहर आ गए

देर रात चली वार्ता के एक दौर में, 25 लाख रुपये की सहायता राशि, संविदा नौकरी और आरोपी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई पर सहमति बनने की बात कही गई, लेकिन बीएपी सांसद राजकुमार रोत और अन्य जनप्रतिनिधियों ने इससे असहमति जताते हुए समझौते से मुकरने की बात कही और पड़ाव जारी रखने का ऐलान किया. बीएपी सांसद राजकुमार रोत ने स्पष्ट कहा कि जब तक उन्हें उचित आर्थिक सहायता नहीं मिल जाती, तब तक पोस्टमार्टम नहीं करवाया जाएगा और पड़ाव जारी रहेगा

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