जोधपुर में देश का दूसरा बड़ा अक्षरधाम मंदिर:500 कारीगरों ने 7 साल में बनाया; 45 डिग्री तापमान में भी रहेगा ठंडा, मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा

जोधपुर में देश का दूसरा बड़ा अक्षरधाम मंदिर:500 कारीगरों ने 7 साल में बनाया; 45 डिग्री तापमान में भी रहेगा ठंडा, मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा

जोधपुर में दिल्ली के बाद देश के दूसरे बड़े अक्षरधाम मंदिर में मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा की गई। यह पहला ऐसा मंदिर है, जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर ही उपयोग में लिया गया है। मंदिर में कहीं भी लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया है, सभी पत्थर इंटरलॉक सिस्टम से जुड़े हैं। मंदिर के लोकार्पण समारोह में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और गजेंद्र सिंह शेखावत पहुंचे।

मंदिर आज से श्रद्धालुओं के लिए खुल गया है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को नशामुक्ति, बच्चों को अच्छे संस्कार देने जैसे अभियान चलाए जाएंगे। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर में ऑटोमैटिक अन्नपूर्णा रसाई बनाई गई है, जिसमें 20 हजार लोगों का खाना एक साथ तैयार होगा।

यह मंदिर देश भर में बने अक्षरधाम मंदिरों में दूसरा सबसे बड़ा मंदिर है। इसको बनाने में लोहे का प्रयोग नहीं किया गया है। इसे जोधपुर के छीतर पत्थरों से बनाया गया है। पत्थर पर छह इंच तक गहरी नक्काशी की गई है। 500 कारीगरों ने करीब सात साल तक दिन-रात मेहनत कर इसे तैयार किया है। इसमें सिरोही घाट शैली का प्रयोग किया गया है। ये मंदिर 45 डिग्री टेम्प्रेचर में भी ठंडा रहता है।

मंदिर में सिर्फ जोधपुरी पत्थर लगाया

देश भर में करीब 150 अक्षरधाम मंदिर हैं। इन सभी मंदिर में बंशी पहाड़पुर और मकराना के मार्बल का उपयोग हुआ है। जोधपुर में बना यह मंदिर पहला ऐसा मंदिर है, जिसमें केवल जोधपुरी पत्थर ही उपयोग में लिया गया है। मुख्य मंडप के अलावा पिलर भी पत्थर के नहीं है। मंदिर में कहीं भी लोहे या स्टेनलेस स्टील का उपयोग नहीं किया गया है, सभी पत्थर इंटरलॉक सिस्टम से जुड़े हैं। पत्थरों की बजाय इन पिलरों को ग्लास फाइबर रीइन्फोर्स्ड जिप्सम (जीएफआरजी) टेक्नोलॉजी से तैयार किया गया है। यानी ये ग्लास, फाइबर और जिप्सम से तैयार हुए हैं। अक्षरधाम मंदिर का निर्माण कार्य 2017 से शुरू हुआ। कोविड काल के दौरान कुछ समय तक काम रुका रहा, लेकिन अब यह पूरा बन चुका है। तकरीबन 40 बीघा परिसर में 10 बीघा में मुख्य मंदिर का निर्माण हुआ है, जो जमीन से 13 फीट ऊंचे आधार पर खड़ा है। मंदिर की कुल लंबाई 181 फीट और ऊंचाई 91 फीट है। इस मंदिर में कुल 281 स्तंभ हैं, जो सभी बीएपीएस मंदिरों में अभूतपूर्व हैं। ये सभी सिरोही घाट शैली के गोलाकार स्तंभ है, जो नीचे से चौड़े और ऊपर से संकरे होते हैं। मंदिर का आकार न तो चौकोर है और न ही आयताकार, बल्कि इसमें आठ से नौ कोण है, जो इसे विशिष्ट आकर्षक शैली प्रदान करते हैं।

3 हजार लोगों का सभा मंडप मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सत्संग सुनने और प्रार्थना के लिए सभा मंडप बनाया गया है। इसमें 3 हजार लोग एक साथ बैठकर सत्संग सुन सकते हैं। 140 गुणा 125 फीट के इस मंडप को पिलर रहित बनाया गया है। यानी सभा मंडप के बीच में कोई भी पिलर दिखाई नहीं देगा।

इस मंडप को पोस्ट-टेंशन (पीटी) स्ट्रक्चर के तहत बनाया गया है। संतों के बैठने के लिए 100 गुणा 30 फीट का स्टेज भी बनाया गया है। यहां पर 14 एसी और 12 हेलिकॉप्टर फैन भी लगाए गए हैं।

एक साथ तैयार होगा 20 हजार लोगों का खाना मंदिर में होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ऑटोमैटिक अन्नपूर्णा रसाई बनाई गई है। इसमें मशीनों से एक साथ 20 हजार लोगों का खाना बनाया जा सकेगा। 500 लोग एक टाइम में प्रसाद ग्रहण कर सकेंगे। मंदिर में किचन ब्लॉक, सर्विस बिल्डिंग, अतिथि गृह बनकर तैयार हो गए हैं।

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